तिरुवनंतपुरम। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने लोकायुक्त के साथ हाल में हुई बैठक को लेकर विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन की आलोचना को खारिज करते हुए उनके आरोपों को भ्रामक और तथ्यों के विपरीत बताया है। चेन्निथला ने कहा कि 23 सितंबर को हुई बैठक लोकायुक्त के अनुरोध पर बुलाई गई थी और इसका उद्देश्य संस्था के कामकाज से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों को सुलझाना था।
विजयन ने आरोप लगाया था कि बैठक के जरिए लोकायुक्त की स्वायत्तता को कमजोर करने और उसे सरकार के नियंत्रण में लाने का प्रयास किया गया। चेन्निथला ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सरकार और लोकायुक्त के बीच प्रशासनिक समन्वय के लिए पहले भी इस तरह की बैठकें होती रही हैं। उन्होंने वर्ष 2006 और 2014 में तत्कालीन सरकारों के दौरान हुई ऐसी बैठकों का भी उल्लेख किया।
चेन्निथला के अनुसार, 23 सितंबर की बैठक लोकायुक्त की ओर से जरूरी प्रशासनिक मामलों में सरकार से हस्तक्षेप और कामकाज में आ रही बाधाओं को दूर करने के अनुरोध के बाद हुई थी। बैठक में लोकायुक्त न्यायमूर्ति अनिल कुमार, उप-लोकायुक्त न्यायमूर्ति अशोक मेनन और न्यायमूर्ति शेर्सी सहित गृह, कानून, वित्त और अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
गृह मंत्री ने बताया कि बैठक में लोकायुक्त ने कई प्रशासनिक मुद्दे उठाए। इनमें सरकारी अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों और याचिकाओं को केरल लोकायुक्त अधिनियम, 1999 की धारा 7(3) के तहत जांच के लिए भेजना, अवमानना नियमों को तैयार करने में तेजी लाना और विशेष अटॉर्नी कार्यालय के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल था।
इसके अलावा लोकायुक्त की जांच शाखा से जुड़े पुलिसकर्मियों के लिए वाहनों की खरीद, वर्दी भत्ता, कर्मचारियों की सेवा शर्तों से संबंधित विशेष नियमों को अधिसूचित करना और केरल लोकायुक्त (संपत्ति विवरण दाखिल करना) संशोधन नियम, 2024 को लागू करने की प्रक्रिया तेज करने जैसे मुद्दे भी उठाए गए।
चेन्निथला ने लोकायुक्त के कामकाज के डिजिटलीकरण और यात्रा भत्ते की सीमा में छूट का मुद्दा भी बैठक में उठाए जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन विषयों को संस्था को कमजोर करने के प्रयास के रूप में देखना तथ्यों से मेल नहीं खाता।







