भुवनेश्वर। ओडिशा के बौध जिले की एक अदालत ने 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर गलत जानकारी देने के मामले में मौजूदा भाजपा विधायक सरोज कुमार प्रधान के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 अक्टूबर की तारीख तय की है और विधायक को अदालत के समक्ष पेश किए जाने का निर्देश दिया है।
बौध के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने मामले में सुनवाई के दौरान पाया कि बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद विधायक अदालत में पेश नहीं हुए। अदालत ने उनकी ओर से कार्यवाही स्थगित रखने की नई मांग को भी स्वीकार नहीं किया।
अदालत ने इससे पहले विधायक के खिलाफ कथित अपराधों का संज्ञान लिया था। यह कार्रवाई जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125(ए) और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 318(1) तथा 336(3) के तहत की गई। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125(ए) चुनावी हलफनामे में गलत घोषणा करने या आवश्यक जानकारी छिपाने से संबंधित है।
विधायक सरोज कुमार प्रधान ने निचली अदालत द्वारा मामले का संज्ञान लिए जाने के आदेश को उड़ीसा उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत की कार्यवाही पर 12 सप्ताह के लिए रोक लगाने का निर्देश दिया था। यह अवधि समाप्त होने के बाद मामले में निचली अदालत में कार्यवाही आगे बढ़ी।
निचली अदालत ने हाल में कार्यवाही पर रोक बढ़ाने की मांग को खारिज करते हुए कहा कि विधायक की ओर से न तो अदालत में उपस्थिति दर्ज कराई गई और न ही उच्च न्यायालय की ओर से अंतरिम राहत की अवधि बढ़ाने संबंधी कोई नया आदेश पेश किया गया।
यह मामला ओडिशा विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप कुमार अमात की ओर से दायर किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि सरोज कुमार प्रधान ने 2024 के विधानसभा चुनाव के लिए दाखिल अपने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी दी थी।
अदालत के आदेश के बाद अब विधायक को अगली सुनवाई में पेश किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।







