न्यूयॉर्क: रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान पर प्रतिबंधों की निगरानी के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ पैनल का कार्यकाल बढ़ाने से जुड़े अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव को वीटो कर दिया। प्रस्ताव के पक्ष में 11 देशों ने मतदान किया, जबकि पाकिस्तान और सोमालिया ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। रूस और चीन के वीटो के कारण प्रस्ताव पारित नहीं हो सका।
यह मतदान ईरान पर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की कानूनी स्थिति को लेकर जारी मतभेदों के बीच हुआ। 2015 के परमाणु समझौते यानी संयुक्त व्यापक कार्य योजना (JCPOA) के तहत ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी की ओर से ‘स्नैपबैक’ तंत्र सक्रिय किए जाने के बाद ईरान पर प्रतिबंध फिर लागू किए गए थे।
रूस और चीन का कहना है कि परमाणु समझौते का समर्थन करने वाले सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2231 की अवधि समाप्त होने के साथ ये प्रतिबंध भी खत्म हो गए। वहीं, अमेरिका और यूरोपीय देश इस व्याख्या से असहमत हैं।
प्रस्तावित विशेषज्ञ पैनल का काम प्रतिबंधों के अनुपालन की निगरानी करना और संभावित उल्लंघनों की रिपोर्ट सुरक्षा परिषद को देना था। हालांकि, सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बनने के कारण पैनल के विशेषज्ञों की नियुक्ति नहीं हो सकी।
अमेरिका की उप राजदूत जेनिफर लोकेटा ने कहा कि वीटो के बाद प्रतिबंधों के संभावित उल्लंघनों की स्वतंत्र और तथ्य-आधारित निगरानी प्रभावित होगी। रूस के राजदूत वासिली नेबेंजिया ने मॉस्को के रुख का बचाव करते हुए कहा कि रूस ईरान मुद्दे पर सुरक्षा परिषद के तरीकों के राजनीतिकरण का विरोध करता है।
ईरान ने रूस और चीन के वीटो का स्वागत किया और दोनों देशों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। मतदान के बावजूद ईरान पर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की कानूनी स्थिति को लेकर विवाद बना हुआ है।







