देहरादून: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने शुक्रवार को पार्टी के दो संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की। यह फैसला उनके निजी सहायक (PA) चंदन सिंह जीना से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद लिया गया है।
रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी सदस्यता और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते कि उनके किसी सहयोगी से जुड़े विवाद का असर कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी लड़ाई पर पड़े।
ED ने गुरुवार को देहरादून में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। एजेंसी के मुताबिक, तलाशी के दौरान चंदन सिंह जीना के घर से 32 लाख रुपये नकद, करीब 200.5 ग्राम सोना और 12 महंगी घड़ियां बरामद की गईं। एजेंसी ने जीना और उनके परिवार के सदस्यों के बैंक खातों में मौजूद करीब 52.16 लाख रुपये भी फ्रीज किए हैं और उनका मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए जब्त किया है।
ED की कार्रवाई 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच का हिस्सा है। एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा की OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित तौर पर हेरफेर कर उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाया गया।
हरीश रावत ने कहा कि जीना उनके OSD के रूप में भी काम कर चुके हैं और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर उन्हें विश्वास नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि जांच में OMR शीट से छेड़छाड़ के आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें इस पर शर्मिंदगी होगी।
रावत ने कहा कि उत्तराखंड की राजनीति चुनावी दौर में प्रवेश कर रही है और उनके खिलाफ एक राजनीतिक नैरेटिव बनाने की कोशिश हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नहीं चाहते कि उनसे जुड़े किसी मामले की वजह से कांग्रेस की भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो। इसी कारण उन्होंने दोनों संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने का निर्णय लिया है।








