स्पोर्ट्स डेस्क: आजादी के महज चार साल बाद भारत ने एशिया में खेलों के एक नए युग की शुरुआत की। 4 से 11 मार्च 1951 तक नई दिल्ली में पहले एशियाई खेलों का आयोजन हुआ। इसमें 11 देशों के 489 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया और आठ खेलों की 57 स्पर्धाओं में मुकाबले हुए।
पहले एशियाई खेलों का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी समारोह में मौजूद रहे। पुराने किले से 31 तोपों की सलामी के साथ शुरू हुए इन खेलों ने भारत को अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में नई पहचान दिलाई।
भारत रहा दूसरे स्थान पर
पदक तालिका में जापान 24 स्वर्ण, 21 रजत और 15 कांस्य सहित कुल 60 पदकों के साथ शीर्ष पर रहा। भारत ने 15 स्वर्ण, 16 रजत और 20 कांस्य समेत कुल 51 पदक जीतकर दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद भारत एशियाई खेलों की पदक तालिका में दूसरे स्थान पर नहीं पहुंच सका।
सचिन नाग ने जीता भारत का पहला स्वर्ण
भारत के लिए पहला स्वर्ण पदक सचिन नाग ने 100 मीटर फ्रीस्टाइल तैराकी में जीता। इसके बाद एथलेटिक्स में लावी पिंटो ने 100 मीटर और 200 मीटर दौड़ में दो स्वर्ण पदक हासिल किए। 800 मीटर दौड़ में रणजीत सिंह ने भी स्वर्ण जीता।
लावी पिंटो का जन्म 23 अक्टूबर 1929 को केन्या के नैरोबी में हुआ था। बाद में वे पढ़ाई के लिए बॉम्बे (अब मुंबई) आए और भारतीय खेलों का हिस्सा बने।
नंगे पैर खेलकर फुटबॉल में जीता स्वर्ण
1951 के एशियाई खेलों में भारतीय फुटबॉल टीम ने भी इतिहास रचा। जूते की कमी के कारण भारतीय खिलाड़ियों ने नंगे पैर मुकाबला खेला और फाइनल में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता।
आजादी से पहले रखी गई थी नींव
एशियाई खेलों के आयोजन की नींव मार्च 1947 में दिल्ली में हुए एशियाई संबंध सम्मेलन के दौरान रखी गई थी। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सदस्य प्रो. जी.डी. सोंधी ने एशियाई देशों के लिए खेल महासंघ और खेल आयोजन का प्रस्ताव रखा था।
संसाधनों की कमी के बावजूद भारत ने इस ऐतिहासिक आयोजन को सफलतापूर्वक पूरा किया। 1951 के ये खेल देश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुए।








