अंतरराष्ट्रीय: नेपाल और तिब्बत से लगे हिमालयी क्षेत्रों में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। गांवों, सड़कों, पुलों और सीमा से जुड़े महत्वपूर्ण ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस प्राकृतिक आपदा के बीच अब तिब्बत में बाढ़ से जुड़ी सूचनाओं और स्थानीय लोगों के वीडियो कथित तौर पर हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, तिब्बत के स्थानीय लोगों ने चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बाढ़ और भूस्खलन से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। इनमें नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित ग्यिरोंग पोर्ट और उसके आसपास हुई भारी तबाही दिखाई दे रही थी। हालांकि, कुछ वीडियो कथित तौर पर ऑनलाइन आने के बाद हटा दिए गए।
अमेरिकी अखबार द न्यूयॉर्क टाइम्स की 27 अगस्त की रिपोर्ट में दावा किया गया कि ग्यिरोंग बॉर्डर क्रॉसिंग को मलबे और पानी की चपेट में दिखाने वाला एक वीडियो चीनी सोशल मीडिया से हटा दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में मलबे का तेज बहाव बॉर्डर पोर्ट के बड़े हिस्से को प्रभावित करता दिखाई दे रहा था।
लापता लोगों की संख्या ने बढ़ाई चिंता
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ग्यिरोंग काउंटी में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। रिपोर्टों में उस समय क्षेत्र में 500 से अधिक लोगों के लापता होने और तीन मौतों की पुष्टि की गई थी। हालांकि, प्रभावित गांवों और बस्तियों के बारे में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने से सूचना की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे।
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ऊंचाई वाले हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़े। बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ पानी का तेज बहाव नेपाल की ल्हेंदे खोला नदी से होते हुए भोटे कोशी और त्रिशूली नदी तंत्र तक पहुंचा। इसके चलते नेपाल में गांवों, पुलों, सड़कों और कई महत्वपूर्ण ढांचों को भारी नुकसान हुआ।
रॉयटर्स की 29 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल में इस आपदा से 675 लोगों की मौत और 2,400 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। इसके मुकाबले चीन की सरकारी मीडिया ने शुरुआती दौर में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में केवल पांच मौतों की जानकारी दी थी। बाद में चीनी आधिकारिक जानकारी में ग्यिरोंग में बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की बात स्वीकार की गई।
चीनी सरकारी मीडिया में राहत अभियान पर जोर
आपदा के बाद चीन की सरकारी मीडिया कवरेज में मुख्य रूप से राहत और बचाव अभियान को प्रमुखता दी गई। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, सेना और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े सैकड़ों कर्मियों को प्रभावित इलाकों में भेजा गया। हेलीकॉप्टर, राहत सामग्री और अन्य उपकरणों की मदद से बचाव अभियान चलाया गया।
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली ने भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के राहत और बचाव कार्यों को पूरी ताकत से आगे बढ़ाने के निर्देशों को प्रमुखता दी।
हालांकि, स्थानीय लोगों द्वारा बनाए गए वीडियो कथित तौर पर हटाए जाने की खबरों ने सरकारी जानकारी और स्वतंत्र रूप से सामने आने वाली तस्वीरों के बीच अंतर को लेकर बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों ने सूचना पारदर्शिता पर जताई चिंता
इंटेलिजेंस विशेषज्ञ एवं भू-राजनीतिक विश्लेषक आदिल ब्रार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दावा किया कि ग्यिरोंग पोर्ट की तबाही दिखाने वाले कुछ वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर थोड़े समय के लिए उपलब्ध रहे और बाद में हटा दिए गए।
रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने भी चीन पर आपदा से जुड़ी सूचनाओं को नियंत्रित करने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि यदि महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक नहीं होती है तो इससे राहत और बचाव अभियानों के साथ-साथ प्रभावित परिवारों तक सही जानकारी पहुंचने में परेशानी हो सकती है।
हालांकि, इन विशेषज्ञों के दावों के संबंध में चीन की ओर से वीडियो हटाए जाने का कोई स्पष्ट सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आया है या नहीं, यह अलग विषय है।
भारतीय नागरिक भी प्रभावित
इस आपदा का असर भारतीय नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सीमा क्षेत्र में करीब 320 भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना थी, जबकि लगभग 400 अन्य लोग चीन की तरफ फंसे हुए बताए गए थे। भारत ने नेपाल के राहत और बचाव अभियान में हरसंभव सहयोग की बात कही है।
आपदा की स्थिति में फंसे लोगों की सही लोकेशन, लापता लोगों की संख्या और प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति की जानकारी बचाव एजेंसियों के लिए बेहद अहम होती है। ऐसे में स्थानीय स्तर से सामने आने वाली तस्वीरें और वीडियो राहत अभियानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।
चीन ने आरोपों को बताया फेक न्यूज
दूसरी ओर, चीन ने उन आरोपों को खारिज किया है जिनमें किसी चीनी बांध या संरचना के टूटने को बाढ़ की वजह बताया गया था। चीन के नेपाल स्थित दूतावास ने ऐसे दावों और समय पर चेतावनी नहीं दिए जाने के आरोपों को ‘फेक न्यूज’ बताया है।
चीनी अधिकारियों का कहना है कि आपदा की शुरुआत नेपाल की ओर हुई और चीन नेपाल के साथ मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में सहयोग कर रहा है। ऐसे में फिलहाल बाढ़ की प्राकृतिक वजहों और चीन की सूचना नीति से जुड़े आरोपों को अलग-अलग मुद्दों के रूप में देखना जरूरी है।







