Nepal glacier bursts, causing floods; hundreds missing, including 32 Indian tourists

काठमांडू: नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी। तिब्बत क्षेत्र में आए भूकंप के कुछ ही मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिलने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) या ग्लेशियर टूटने की आशंका जताई जा रही है। बाढ़ में सड़कें और पुल बह गए, घरों व वाहनों को भारी नुकसान पहुंचा और कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह टूट गया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि बुधवार सुबह स्थानीय समयानुसार 8:37 बजे तिब्बत क्षेत्र में भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। इस घटनाक्रम के आधार पर आशंका है कि भूकंप के झटकों से ग्लेशियल झील या ग्लेशियर से जुड़ी कोई घटना हुई, जिसके कारण अचानक भारी मात्रा में पानी नीचे की ओर आया।

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ग्लेशियर का 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटा

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट तस्वीरों के अध्ययन से संकेत मिला है कि करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर करीब 4,000 फीट नीचे नदी घाटी में गिरा। कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिक डेनियल शुगर के अनुसार, इतने बड़े हिमखंड के ऊंचाई से गिरने के कारण ल्हेंडे खोला नदी में अचानक प्रचंड बाढ़ आई, जो आगे चलकर भोटेकोशी नदी में पहुंच गई।

100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में घुसा सैलाब

काठमांडू पोस्ट के अनुसार, रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि जब उन्होंने बाहर निकलकर ऊपर की ओर देखा तो धुएं जैसे गुबार के साथ पानी की एक विशाल दीवार तेजी से तिमुरे बाजार की ओर आती दिखाई दी। उनके मुताबिक, बाढ़ करीब 100 मीटर ऊंची लहर की तरह बाजार में दाखिल हुई और कुछ ही पलों में पूरा बाजार तबाह हो गया।

रसुवा और धाडिंग के साथ नुवाकोट भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार, करीब एक दर्जन जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे बिजली संकट की आशंका बढ़ गई है। तीनों जिलों में कंक्रीट के 22 पुल और पांच बेली ब्रिज बह गए, जबकि करीब 42 किलोमीटर सड़क भी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो गई।

बाढ़ का पानी नुवाकोट के अलावा चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी ईस्ट जिलों तक फैल गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। प्रभावित लोगों को इलाज, राहत और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं।

भारत के कई राज्यों के लोग नेपाल में फंसे

नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत के कई राज्यों के नागरिकों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल भी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर हो गया है। दल में 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल हैं।

यह दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे दल रसुवागढ़ी पहुंचा था, जहां से उसे नेपाल-तिब्बत सीमा पार कर तिब्बत जाना था। दल के सदस्य इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी अचानक बाढ़ आ गई।

इसके बाद दल के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था बुरी तरह बाधित होने और रास्ते टूट जाने के कारण राहत टीमों के लिए मौके तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

टूर एजेंसी के प्रतिनिधि दिव्य ज्योति बसु के अनुसार, दोनों टूर मैनेजर जयंत सान्याल और नृपेन सरकार के मोबाइल में रोमिंग सुविधा थी। उनसे आखिरी बार बुधवार सुबह करीब 8 बजे संपर्क हुआ था। इसी दौरान कुछ पर्यटकों ने फेसबुक पर लाइव भी किया था। इसके बाद सभी से संपर्क टूट गया।

टूर एजेंसी के मुताबिक, नेपाल में अंतरराष्ट्रीय यात्रा की व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी ने प्रभावित क्षेत्र में हेलीकॉप्टर भेजकर तलाश और बचाव अभियान शुरू करने की कोशिश की है। वहीं, केरल के 37 पर्यटकों के नेपाल में फंसे होने की भी जानकारी सामने आई है। कर्नाटक समेत कई राज्यों की सरकारें अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हेल्पलाइन तथा अन्य व्यवस्थाएं सक्रिय कर रही हैं।