
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन के करीब नौ महीने बाद पार्टी के भीतर संगठन और रणनीति को लेकर मंथन तेज होने की चर्चा है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बिहार प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से चुनावी प्रदर्शन को लेकर बातचीत की है। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 243 में से 61 सीटों पर चुनाव लड़ने का मौका मिला था। इनमें पार्टी महज छह सीटों पर जीत हासिल कर सकी, जबकि पांच सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। चुनाव परिणाम के बाद पार्टी के भीतर टिकट वितरण, सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
कांग्रेस ने चुनाव से पहले संगठन में बदलाव करते हुए कृष्णा अल्लावरु को बिहार का प्रभारी और राजेश राम को प्रदेश अध्यक्ष बनाया था। राहुल गांधी ने भी बिहार चुनाव के दौरान व्यापक स्तर पर प्रचार किया और कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इसके बावजूद पार्टी के प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार, हालिया बैठक में बिहार चुनाव के दौरान संगठन के कामकाज, सीटों के बंटवारे और उम्मीदवार चयन समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने ऐसी किसी विशेष फटकार या कार्रवाई से इनकार किया है। उनका कहना है कि पार्टी बिहार में नए तरीके से संगठन के विस्तार पर काम कर रही है।
चुनाव के दौरान कांग्रेस के भीतर सीटों की संख्या को लेकर भी असंतोष सामने आया था। पार्टी ने सभी 243 विधानसभा सीटों के लिए आवेदन मांगे थे, लेकिन महागठबंधन में सीट बंटवारे के बाद उसे 61 सीटों पर ही चुनाव लड़ना पड़ा। इसके बाद टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के छह विधायकों में से कुछ के एनडीए के संपर्क में होने की चर्चाएं भी सामने आई थीं। हालांकि, ऐसी किसी संभावित टूट की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा विधानसभा में एनडीए की मजबूत स्थिति को देखते हुए इस तरह की अटकलों पर भी राजनीतिक नजरें बनी हुई हैं।
कांग्रेस नेतृत्व की ओर से बिहार में संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए नई रणनीति तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। अब नजर इस बात पर है कि चुनावी समीक्षा के बाद पार्टी नेतृत्व बिहार संगठन में क्या बदलाव करता है और प्रदेश में कांग्रेस को फिर से मजबूत करने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाई जाती है।






