
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर चुनाव आयोग के फैसले और शिवसेना के नाम-चिह्न को लेकर विवाद तेज हो गया है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी का वैध नाम और ऐतिहासिक ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न छीनने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपये का सौदा किया गया।
मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम पर सरकार और चुनाव आयोग को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में एक ‘अयोग्य व्यक्ति’ को कथित तौर पर अवैध तरीके से मुख्यमंत्री पद पर बैठाया गया और चुनाव आयोग ने निष्पक्ष प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
राउत का आरोप है कि चुनाव आयोग ने फैसला सुनाने से पहले उनकी पार्टी का पक्ष ठीक से नहीं सुना। उन्होंने आयोग पर एक ‘मोहरे’ की तरह काम करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि पर्दे के पीछे राजनीतिक तालमेल के जरिए पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न हासिल किया गया।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने महाराष्ट्र में राजनीतिक विभाजन के लिए सीधे तौर पर गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या परिसीमन विधेयक पारित कराने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ना और उनमें फूट डालना संवैधानिक है।
विदेश नीति के मुद्दे पर भी राउत ने केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ दूसरे देशों के नेताओं को गले लगाना विदेश नीति नहीं है, बल्कि विदेश नीति का उद्देश्य दुनिया में भारत का सम्मान और प्रभाव बढ़ाना होना चाहिए।
राउत ने बेरोजगारी और महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि देश में राजनीतिक माहौल और जनता की भावनाएं सत्तारूढ़ गठबंधन के खिलाफ बदल रही हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि मौजूदा सरकार 2029 से पहले ही सत्ता से बाहर हो सकती है।






