श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में वार्षिक श्री अमरनाथ जी यात्रा का आखिरी चरण बुधवार को ‘हरियाली-अमावस्या’ (श्रावण अमावस्या) के मौके पर श्रीनगर में गोपाद्रि पहाड़ी पर बने ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर में पवित्र छड़ी-मुबारक की पारंपरिक पूजा के साथ शुरू हुआ।
महंत दीपेंद्र गिरि की अगुवाई में पवित्र छड़ी को पुरानी परंपराओं के अनुसार प्राचीन मंदिर ले जाया गया, जहाँ केंद्र शासित प्रदेश और देश की शांति, समृद्धि और भलाई के लिए विशेष प्रार्थनाएँ की गयीं। पूजा के दौरान वैदिक मंत्रों के उच्चारण से मंदिर का माहौल शंख की ध्वनि से गूंज उठा। पवित्र छड़ी के साथ आए साधुओं ने भी प्रार्थनाओं में हिस्सा लिया, जो लगभग 90 मिनट तक चलीं।महंत दीपेंद्र गिरि ने प्रार्थना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इतिहासकारों का मानना है कि पहाड़ी की चोटी पर स्थित यह मंदिर मूल रूप से राजा संदिमान ने 2629 और 2564 ईसा पूर्व के बीच बनवाया था।
उन्होंने बताया कि इस मंदिर को पहले ज्येष्ठेश्वर या ज्योतिश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था और आदि गुरु शंकराचार्य के यहाँ आने के बाद इसे श्री शंकराचार्य मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। जिस पहाड़ी पर यह मंदिर बना है, उसे पहले जेठा लरक कहा जाता था और बाद में गोपाद्रि पहाड़ी कहा जाने लगा। पवित्र छड़ी-मुबारक की पारंपरिक यात्रा गुरुवार, 13 अगस्त को जारी रहेगी, जब इसे श्रीनगर में हरि पर्वत पर स्थित ऐतिहासिक शारिका-भवानी मंदिर ले जाया जाएगा, जहाँ देवी की पूजा-अर्चना की जाएगी।
पवित्र छड़ी-मुबारक के 28 अगस्त को पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर पहुँचने का कार्यक्रम है, जिस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा है। सालाना तीर्थयात्रा का पारंपरिक समापन गुफा मंदिर में विशेष प्रार्थनाओं और अनुष्ठानों के साथ होगा, जो पवित्र छड़ी से जुड़ी पुरानी परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार किए जाएँगे।







