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15 संरक्षित धरोहर स्थलों के आसपास खनन, निर्माण पर हरियाणा लगाएगा सख्त पाबंदियां

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Haryana to impose strict restrictions on mining, construction around 15 protected heritage sites

पंचकूला: हरियाणा सरकार ने राज्य के 15 संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों के संरक्षण के लिए उनके आसपास खनन और निर्माण गतिविधियों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संरक्षित सीमा से 15 मीटर तक का क्षेत्र निषिद्ध और उसके आगे 30 मीटर का क्षेत्र विनियमित घोषित किया जाएगा।


हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन विभाग ने छह अगस्त, 2026 को इस संबंध में मसौदा अधिसूचना जारी की है। यह प्रस्ताव हरियाणा प्राचीन एवं ऐतिहासिक स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष नियम, 1965 के नियम 29 के तहत तैयार किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह मसौदा अधिसूचना है। इच्छुक लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं।

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राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से 60 दिन की अवधि पूरी होने के बाद प्राप्त आपत्तियों और सुझावों पर विचार किया जाएगा। इन्हें निर्धारित अवधि में हरियाणा के पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशक के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकेगा।


प्रस्तावित सूची में नूंह के गुम्मट बिहारी गांव का गुम्बद, भिवानी के तिगड़ाना और मिताथल के प्राचीन स्थल, नूंह के तावड़ू में 20वीं सदी के कब्रों का समूह, महेंद्रगढ़ के नारनौल में नागपुरियन बावड़ी और मुकुंदपुरा बावड़ी, चरखी दादरी का श्यामसर तालाब तथा कैथल का किला शामिल हैं।


इसके अलावा सूची में रेवाड़ी की छतरियों का समूह, सोहना का किला, पलवल के गोपालगढ़ स्थित अशावा खेड़ा, महेंद्रगढ़ का किला, पलवल के कोडला खेड़ा का पुराना टीला, रेवाड़ी के गुरियानी स्थित बाबू बाल मुकुंद की विरासत हवेली और रोहतक स्थित उपायुक्त आवास भी शामिल हैं।


मसौदे के अनुसार संरक्षित सीमा से 15 मीटर तक के क्षेत्र में खनन और निर्माण निषिद्ध होंगे। इसके आगे लगे 30 मीटर क्षेत्र को विनियमित क्षेत्र रखा जाएगा, जहां इन गतिविधियों पर निर्धारित नियमों के तहत नियंत्रण रहेगा।


सरकार का यह कदम संरक्षित स्मारकों और पुरातात्विक अवशेषों के आसपास गतिविधियों के लिए स्पष्ट सुरक्षा दायरा तय करने की दिशा में है। अधिसूचना विरासत एवं पर्यटन विभाग ने जारी की है और इस पर हरियाणा सरकार के आयुक्त एवं सचिव अमित कुमार अग्रवाल के हस्ताक्षर हैं।