
नयी दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह को संसद में बुलाने की विपक्ष की लंबे समय से चल रही मांग के बीच राज्यसभा में सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को विपक्ष की भावना श्री शाह तक पहुंचाने का निर्देश दिया।
एक बार स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जब सदन में प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कुछ कहना चाहा। विपक्ष की नारेबाजी के बीच पर्यटन मंत्रालय से संबंधित पहला प्रश्न पूरा होने के बाद श्री राधाकृष्णन ने उन्हें बोलने का मौका दिया। श्री खरगे ने उनसे अनुरोध किया कि वह प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को सदन में आने का निर्देश दें।
इस पर श्री रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष मांग कर सकते हैं, अनुरोध कर सकते हैं लेकिन वह सदन को अपने हिसाब से नहीं चला सकते। उन्होंने कोई नियम नहीं बताया है और सीधे आसन को निर्देश दे रहे हैं। वह यह तय नहीं कर सकते कि किस मंत्री को किस दिन आना है।
सभापति ने कहा कि श्री खरगे ने कोई निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने कहा, “उन्होंने (नेता प्रतिपक्ष ने) मेरे जरिये अनुरोध भर किया है। उन्होंने विपक्ष की भावना व्यक्त की है। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में आपको उस भावना को गृह मंत्री तक पहुंचाना है, यह मेरा अनुरोध है।” श्री रिजिजू ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह गृह मंत्री तक यह बात पहुंचा देंगे।
सत्ता पक्ष की तरफ से शोर-शराबे के बीच श्री खरगे ने अपनी बात रखते समय सुबह शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के पवन खेड़ा पर संसदीय कार्य मंत्री की टिप्पणी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “आपने पवन खेड़ा का नाम लेकर उनका अपमान किया है, जैसे आप ही सर्वेसर्वा हैं।”
सदन में हर दिन एक ही मुद्दा उठाने के आरोप को लेकर भी सत्ता पक्ष और प्रतिपक्ष के बीच कहा-सुनी हुई। श्री खरगे ने कहा, “यह मेरा अधिकार है कि मैं क्या बोलूं, कब बोलूं और कैसे बोलूं। मैं सिर्फ तथ्यपूर्ण प्रश्न उठाना चाहता हूं जो देश के लिए महत्वपूर्ण हैं। हम देश के 140 करोड़ लोगों के मुद्दे उठा रहे हैं। हम सिर्फ यही मांग कर रहे हैं कि गृह मंत्री सदन में आयें, प्रधानमंत्री सदन में आयें और बयान दें। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को निर्देश दें कि वे सदन में आयें और बयान दें, हम चर्चा के लिए तैयार हैं।”
उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के राज्यसभा में दिये गये एक वक्तव्य का अंश भी पढ़ा जिसमें भाजपा नेता ने कहा था कि व्यवधान लोकतंत्र का हिस्सा है, सदस्य प्रक्रिया से संबंधित कोई भी प्रश्न उठा सकते हैं। श्री खरगे ने आरोप लगाया कि जब विपक्ष प्रश्न पूछता है तो सरकार उत्तर नहीं देती है।
श्री रिजिजू ने कहा कि सभापति ने नेता प्रतिपक्ष को हर दिन बोलने का मौका दिया है लेकिन उन्होंने बार-बार वहीं बात उठायी। नियम 240 कहता है कि एक सदस्य उसी बात को दोबारा नहीं उठा सकता जो वह आसन की अनुमति से पहले उठा चुका है।
इसके बाद कानून मंत्रालय से संबंधित एक और प्रश्न पूछा गया। इस बीच दूसरे विपक्षी सदस्यों ने भी व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कुछ मुद्दे उठाने चाहे। संसदीय कार्यमंत्री को उनके निर्देश के बाद भी विपक्ष का हंगामा शांत न होता देख दोपहर 12.30 बजे के करीब सभापति ने सदन की कार्यवाही अपराह्न 2.15 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।






