चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधियों के बीच बुधवार शाम करीब चार घंटे तक चली वार्ता बेनतीजा रही। इसके बाद संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया कि 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राज्यव्यापी हड़ताल हर हाल में की जाएगी। संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से गुरुवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में कर्मचारियों और इंजीनियरों की लंबित मांगों, एचवीपीएनएल और एचपीजीसीएल के पुनर्गठन, प्रस्तावित कृषि वितरण निगम (एग्री डिस्कॉम), गुरुग्राम और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस, स्मार्ट मीटरिंग योजना, बिजली क्षेत्र के निजीकरण तथा अन्य नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई।
मोर्चे का आरोप है कि सरकार और बिजली निगम प्रबंधन ने किसी भी मांग पर समयबद्ध निर्णय लेने के बजाय केवल आश्वासन दिए। साथ ही कर्मचारियों से प्रस्तावित हड़ताल स्थगित करने का अनुरोध किया गया, जिसे संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कर्मचारियों के व्यापक हित में सिरे से खारिज कर दिया। बैठक में संयुक्त संघर्ष मोर्चा की ओर से अध्यक्ष देवेंद्र सिंह हुड्डा, इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुंडू, महासचिव रविंद्र घंघास, बलजीत बेनीवाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
देवेंद्र सिंह हुड्डा और रविंद्र घंघास ने आरोप लगाया कि सरकार बिजली क्षेत्र में एकतरफा और मनमाने फैसले लागू करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों, अधिकारियों और उपभोक्ताओं के हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक लंबित मांगों का सम्मानजनक समाधान नहीं होता और बिजली क्षेत्र के निजीकरण से जुड़े फैसलों पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पुनीत कुंडू ने कहा कि संगठन गुरुग्राम और नूंह जैसे अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने का विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि निजी कंपनियों को सार्वजनिक बिजली ढांचे का उपयोग करने की अनुमति देने से राज्य के वित्तीय हित प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियां जनसेवा के बजाय लाभ कमाने को प्राथमिकता देंगी और इस प्रस्ताव को तत्काल रद्द करने की मांग की।
संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने प्रस्तावित हरियाणा एग्री डिस्कॉम का भी विरोध किया। कर्मचारियों का कहना है कि यह बिजली क्षेत्र के निजीकरण की दिशा में एक और कदम है, जिससे सात लाख से अधिक कृषि उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं। उनका तर्क है कि जिन क्षेत्रों में कृषि फीडरों का पृथक्करण होना था, वहां यह कार्य पहले से ही टेंडर के माध्यम से कराया जा रहा है, इसलिए अलग निगम बनाने की आवश्यकता नहीं है।
बलजीत बेनीवाल ने कहा कि एचवीपीएनएल और एचपीजीसीएल के पुनर्गठन का मामला लंबे समय से लंबित है, लेकिन प्रबंधन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो 11 से 13 अगस्त तक प्रस्तावित राज्यव्यापी हड़ताल हर हाल में आयोजित की जाएगी।







