
रांची: झारखंड की राजधानी रांची सावन की पहली सोमवारी पर पूरी तरह शिवमय हो गया। पहाड़ी मंदिर समेत शहर के सभी प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से मंदिर परिसर और पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। भगवान भोलेनाथ के प्रिय माने जाने वाले सावन माह की पहली सोमवारी पर हजारों श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर सुख, समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की।
राजधानी के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में तड़के सुबह 3:30 बजे से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। मंदिर प्रशासन ने सुबह 4 बजे से दर्शन और जलार्पण की व्यवस्था शुरू कर दी। इसके बाद दिनभर भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। महिलाएं, पुरुष, बच्चे और बुजुर्ग हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, दूध, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचे। श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन, पहाड़ी मंदिर विकास समिति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों, आदिवासी समाज तथा पहन समाज के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से व्यापक व्यवस्था की। मंदिर में प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए, जिससे भीड़ का दबाव नियंत्रित रहा। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई। जलार्पण के दौरान पहले महिलाओं और उसके बाद पुरुष श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश दिया गया, जिससे व्यवस्था अनुशासित और सुचारू बनी रही।
मंदिर परिसर में श्रद्धालु शांतिपूर्वक कतारबद्ध होकर सीढ़ियां चढ़ते नजर आए। स्वयंसेवक लगातार श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे, जबकि प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे। भारी भीड़ के बावजूद कहीं भी अव्यवस्था या अफरा-तफरी की स्थिति नहीं बनी। पहाड़ी मंदिर के अलावा चुटिया स्थित सुरेश्वर महादेव मंदिर, महाकाल मंदिर तथा राजधानी के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई। कई मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अर्घा सिस्टम के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था की गई, जिससे बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तों को आसानी से पूजा करने का अवसर मिला।
सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह चाक-चौबंद रही। मंदिर परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था संभालते रहे। पूरे परिसर पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी गई, जबकि विभिन्न स्थानों पर तैनात वालंटियर श्रद्धालुओं को दिशा-निर्देश देने, कतारों को व्यवस्थित रखने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटे रहे।






