देवघर: देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में श्रद्धालुओं और कांवरियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। आज तड़के मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद कांचा जल स्नान और पारंपरिक सरदारी पूजा विधि से भगवान शिव की पूजा की गई। पूजा के बाद अरघा से जल अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू हुई। कांवरियों की लंबी कतारें सुबह से ही मंदिर परिसर में देखी गईं। पूरा देवघर ‘बोल बम’ के जयघोष से गूंज रहा है। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा बैद्यनाथ का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ रहे हैं और जलाभिषेक कर रहे हैं। आचार्य राकेश झा ने बताया शिव की उपासना का सबसे उत्तम मास सावन का आरंभ आज कई शुभ संयोग में हो रहा है I आजश्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग व सौभाग्य योग का संयोग रहेगा I
ऐसे शुभ एवं उत्तम संयोग में उमा-महेश्वर की पूजा-आराधना, व्रत, जलार्पण करना बहुत की पुण्यप्रदायक होगा I सभी देवो में सबसे सरल पूजा भगवान शिव की है I केवल जल और बेलपत्र चढ़ाने से भी प्रसन्न होकर मनचाहा वरदान देते है I ज्योतिषी झा ने कहा सावन मास में चार सोमवार का अद्भुत संयोग बना है I जिसमें दो कृष्ण पक्ष व दो शुक्ल पक्ष में होंगे। सावन का पहला सोमवार 03 अगस्त इसके बाद दूसरी सोमवारी 10 अगस्त, तीसरी सोमवारी 17 अगस्त, चौथी एवं अंतिम सोमवारी 24 अगस्त को है।28 अगस्त को श्रावण मास का समापन होगा।
श्रावण माह में भगवान शिव की पूजा, महामृत्युंजय मंत्र जाप व अभिषेक आदि से बाधा, रोग, शोक, कर्ज से मुक्ति मिलती है । शिव पूजा के साथ “ॐ नमः शिवाय” का जाप, शिव पंचाक्षर, रुद्राष्टक, शिव चालीसा आदि का पाठ करने से मनचाहा वरदान मिलता है I
पंडित झा ने पौराणिक कथाओं के हवाले से बताया कि सावन मास में समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मथने के बाद जो हलाहल विष निकला, उसे भगवान शंकर ने अपने कंठ में समाहित कर सृष्टि की रक्षा की, लेकिन विषपान से महादेव का कंठ नीलवर्ण हो गया। इसी से उनका नाम ‘नीलकंठ महादेव’ पड़ा। विष के प्रभाव को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिवलिंग पर जल चढ़ाने का ख़ास महत्व है। यही वजह है कि श्रावण मास में भोले को जल चढ़ाने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ‘शिवपुराण’ के अनुसार भगवान शिव स्वयं ही जल हैं। इसलिए जल से उनकी अभिषेक के रूप में अराधना का उत्तमोत्तम फल है I
जातक या परिवार में किसी सदस्य को असाध्य बीमारी हो गई हो तो उसे सावन में सोमवार को जल में दूध व काले तिल डालकर शिवलिंग का अभिषेक करें। अभिषेक करते समय ‘ॐ जूं स:’ मंत्र का जाप करते रहें। इसके अलावा 11 हजार, 21 हजार या 1.25 लाख बार महामृत्युंजय का जाप करने या किसी योग्य ब्राह्मण को संकल्प देने से असाध्य बीमारी ,रोग, शोक, दु:ख, जरा व मृत्यु के बंधनों से मुक्ति मिलती है I







