
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात् परम ब्रह्म का स्वरूप माना गया है और गुरु-शिष्य परंपरा देश की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है।
सोशल मीडिया एक्स पर सोमवार को जारी अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने कहा कि विक्रम संवत 2083 की आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा पर मनाया जाने वाला यह पर्व महर्षि वेदव्यास की स्मृति को समर्पित है। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि संस्कार, सत्य और आत्मज्ञान के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाले होते हैं।
योगी ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और शिक्षकों के सम्मान तथा कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक ऑनलाइन चिकित्सा योजना का विस्तार किया गया है, जिससे बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा सहित उच्च शिक्षा संस्थानों के लाखों शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रित लाभान्वित हो रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा बीमा कवर की भी व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसा अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां वे राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से निभा सकें। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव बनाए रखने तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि गुरु जीवन में सही दिशा दिखाने वाले प्रकाश स्तंभ हैं। गुरु के बताए मार्ग पर चलकर ही व्यक्ति सत्य, संस्कार और सफलता प्राप्त कर सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि गुरुजनों के आदर्शों का अनुसरण करने से विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास होगा और विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण का लक्ष्य भी साकार होगा।






