
प्रतापगढ़: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ शहर में वर्षों से चली आ रही खारे पानी की समस्या से लोगों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए चिलबिला क्षेत्र में 37 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) स्थापित किया जाएगा। इसके लिए लगभग एक हेक्टेयर भूमि चिन्हित कर ली गई है तथा नगर पालिका परिषद परियोजना की विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) तैयार कराने में जुटी है। नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी राकेश कुमार ने शुक्रवार को बताया कि नगर पालिका क्षेत्र के विस्तार के बाद शहर की आबादी लगभग एक लाख से बढ़कर 1.25 लाख हो गई है। बढ़ती आबादी को देखते हुए स्वच्छ एवं पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कार्य शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए कच्चे पानी की आपूर्ति प्रयागराज जिले के श्रृंगवेरपुर क्षेत्र से पाइपलाइन के माध्यम से की जाएगी। प्लांट में पानी का शोधन करने के बाद उसे शहर के विभिन्न इलाकों में पेयजल आपूर्ति नेटवर्क के जरिए पहुंचाया जाएगा।
अधिशासी अधिकारी के अनुसार परियोजना के लिए चिलबिला में भूमि का चयन कर लिया गया है और डीपीआर तैयार होने के बाद इसे शासन की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण होने पर प्रतापगढ़ शहर के नागरिकों को खारे पानी की समस्या से स्थायी राहत मिलेगी और प्रत्येक घर तक गुणवत्तापूर्ण एवं शुद्ध पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। इसके साथ ही भविष्य की बढ़ती आबादी की जलापूर्ति आवश्यकताओं को भी ध्यान में रखकर परियोजना की क्षमता निर्धारित की गई है।






