
नयी दिल्ली: रेलवे ने यात्री और माल परिवहन को बेहतर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। रेलवे ने दक्षिण पूर्व रेलवे में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन और मिदनापुर के बीच तीसरी लाइन के निर्माण करने का निर्णय लिया है। रेलवे ने गुरुवार को बताया कि 14.52 किलोमीटर लंबी इस लाइन के निर्माण के लिए 440 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गयी है। रेलवे के अनुसार यह परियोजना ज़्यादा घनत्व वाले मार्गों पर नेटवर्क क्षमता बढ़ाने के भारतीय रेलवे के लगातार प्रयासों का हिस्सा है। इसका उदेश्य है कि यात्री और मालगाड़ियों की तेज़ी गति से आवाजाही हो सके और साथ ही उद्योगों तथा ज़रूरी सामानों की बढ़ती परिवहन ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।
रेलवे के अनुसार, यह रेलखंड ‘हाई यूटिलाइजेशन नेटवर्क’ (एचयूएन-2) का हिस्सा है। वर्तमान में निमपुरा वेस्ट आउटर केबिन-गोकुलपुर रेलखंड एकल लाइन है और इसका दोहरीकरण कार्य पहले से जारी है। इसके साथ तीसरी लाइन बिछाए जाने से इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा ट्रेन संचालन अधिक सुगम और लचीला हो सकेगा।
रेलवे के अनुसार, इस रेलमार्ग पर यात्री और मालगाड़ियों का भारी आवागमन होता है। इस मार्ग से मैंगनीज, लौह अयस्क, कंटेनर, कोयला, क्लिंकर, आयरन पेलेट, लोहा एवं इस्पात, गेहूं, पत्थर, स्लीपर, स्लैग, नमक, चावल, पेट्रोलियम उत्पाद, चूना पत्थर, जिप्सम, उर्वरक, खाद्य तेल, रासायनिक नमक, चारकोल, सीमेंट, बैलास्ट और राख सहित विभिन्न वस्तुओं का परिवहन किया जाता है। इस रेलखंड पर वार्षिक माल ढुलाई लगभग 238 लाख टन (एमटीपीए) है।
रेलवे ने बताया कि मौजूदा रेलखंड 115.71 प्रतिशत लाइन क्षमता उपयोग पर चल रहा है, जो भारी भीड़भाड़ को दर्शाता है। तीसरी लाइन से बढ़ते यात्री और माल ढुलाई को संभालने के लिए अतिरिक्त क्षमता बनेगी और पूरे गलियारे में संचालन दक्षता बेहतर होगी। बेहतर रेल क्षमता के ज़रिए आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। रेलवे के अनुसार इस परियोजना के पूरा होने पर प्रति वर्ष 35.2 लाख टन (एमटीपीए) अतिरिक्त माल की ढुलाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर अवसंरचना से ज़रूरी सामान की आवाजाही आसान होगी, कामकाज में आने वाली रुकावटें कम होंगी, नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी और इस अहम रेल गलियारे पर निर्भर उद्योगों और व्यवसायों के लिए सम्पर्क मज़बूत होगा। इससे मालगाड़ियों और यात्रियों की तेज़ी से आवाजाही मुमकिन होगी और साथ ही एक आधुनिक, कुशल और भविष्य के लिए तैयार रेलवे नेटवर्क के ज़रिए आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।






