
कोरबा: छत्तीसगढ़ के कोरबा वन मंडल ने अंतरजिला स्तर पर सक्रिय साल लकड़ी तस्करी के एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए रायपुर जिले के अभनपुर स्थित एक आरा मिल से लगभग 20 घन मीटर साल लकड़ी बरामद की है। मामले में कुख्यात लकड़ी तस्कर सुनील कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है, जबकि संबंधित आरा मिल संचालक के विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है।
वन विभाग से मंगलवार को जानकारी के अनुसार, कोरबा के पुराना बस स्टैंड निवासी सुनील कुमार गुप्ता ने राष्ट्रीयकृत एवं विनिर्दिष्ट वनोपज की श्रेणी में आने वाली साल लकड़ी का अवैध परिवहन कर उसे रायपुर जिले के अभनपुर स्थित मामनचंद हुकुमचंद आरा मिल में बेच दिया। आरोपी ने अवैध गतिविधि को छिपाने के लिए वन विभाग को गुमराह करने का भी प्रयास किया।
विभाग को मुखबिर से अवैध परिवहन की सूचना मिलने के बाद कार्रवाई शुरू की गई। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले लकड़ी बिलासपुर में उतारे जाने की जानकारी देकर अधिकारियों को भ्रमित करने का प्रयास किया, लेकिन सघन पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि लकड़ी अभनपुर स्थित उक्त आरा मिल में बेची गई थी।
आरोपी के खुलासे के बाद बालको, पसरखेत, करतला, लैमरू और उत्पादन कुदमुरा के वन परिक्षेत्र अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने अभनपुर पहुंचकर आरा मिल और टाल की जांच की, जहां से करीब 20 घन मीटर साल लकड़ी बरामद की गई। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और आवश्यक दस्तावेजीकरण भी किया गया। कोरबा डीएफओ प्रेमलता यादव से प्राप्त सूचना के आधार पर रायपुर डीएफओ लोकनाथ पटेल के नेतृत्व में वन विभाग ने आरा मिल पर छापामार कार्रवाई की। जांच के दौरान बड़ी मात्रा में अवैध वनोपज मिलने पर आरा मिल को सील कर दिया गया। साथ ही लकड़ी से लदा एक ट्रैक्टर, क्रेन तथा परिवहन में प्रयुक्त अन्य वाहनों को भी जब्त किया गया।
विशेष जांच दल ने आरोपी सुनील कुमार गुप्ता की निशानदेही तथा आरा मिल संचालक की उपस्थिति में लकड़ियों की पहचान कर पंचनामा तैयार किया। इसके बाद जब्त साल लकड़ी को वापस कोरबा लाकर कसनिया डिपो में सुरक्षित जमा कराया गया। वन विभाग ने आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को पुलिस के सुपुर्द कर दिया। उसके विरुद्ध शासकीय संपत्ति की चोरी और अवैध परिवहन के मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया।
न्यायालय ने आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और आदतन तस्करी की प्रवृत्ति को देखते हुए उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। वन विभाग ने बताया कि प्रकरण में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है तथा पूरे तस्करी नेटवर्क के विरुद्ध आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। यह कार्रवाई कोरबा और रायपुर वन विभाग के समन्वित अभियान का हिस्सा रही।






