चंडीगढ़: पंजाब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि उनका मंदिरों और सनातन धर्म के प्रति प्रेम केवल चुनावी मौसम तक सीमित है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले और वहां अस्पताल बनाने की बात कहने वाले श्री केजरीवाल अब पंजाब में मंदिरों की बात कर रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक अवसरवादिता को दर्शाता है।
श्री ढिल्लों ने बुधवार को कहा कि पंजाब दौरे के दौरान श्री केजरीवाल द्वारा बार-बार हिंदुत्व और मंदिरों का उल्लेख केवल चुनावी लाभ हासिल करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने हमेशा सनातन धर्म और मंदिरों को राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया है, लेकिन अब पंजाब की जनता उनके इस दोहरे चरित्र को समझ चुकी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर प्राण प्रतिष्ठा जैसे ऐतिहासिक अवसर से दूरी बनाने वाले केजरीवाल अब पंजाब में हिंदू समाज को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पूरा देश भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा के उत्सव में शामिल था, तब श्री केजरीवाल ने दिल्ली में राजनीतिक उद्देश्य से सुंदरकांड का आयोजन किया।
उन्होंने कहा कि जनवरी 2025 में रावण को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले केजरीवाल अब धर्म पर प्रवचन देने का प्रयास कर रहे हैं। जिन्हें रामायण की मूल समझ तक नहीं है, वे पंजाब के लोगों को धर्म का पाठ नहीं पढ़ा सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी सनातन धर्म के सम्मान का मुद्दा आता है, श्री केजरीवाल का रुख अलग होता है, लेकिन चुनाव आते ही वे मंदिरों के चक्कर लगाने लगते हैं।
श्री ढिल्लों ने श्री केजरीवाल से सवाल किया कि दिल्ली में करीब 10 वर्ष सत्ता में रहने के दौरान उनकी सरकार ने किसी बड़े मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्थान के विकास के लिए क्या काम किया। उन्होंने कहा कि पंजाब में बड़े-बड़े दावे करने से पहले उन्हें दिल्ली में धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए किए गए कार्यों का हिसाब देना चाहिए।
अपने बयान में श्री ढिल्लों ने आरोप लगाया कि साढ़े चार वर्षों से पंजाब को बर्बाद करने वाले लोगों को धर्म पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता धार्मिक भावनाओं का राजनीतिक इस्तेमाल बर्दाश्त नहीं करेगी और दिल्ली की सत्ता गंवाने के बाद केजरीवाल अब पंजाब में धार्मिक मुद्दों के सहारे अपनी राजनीति को पुनर्जीवित करने का असफल प्रयास कर रहे हैं।







