कर्नाटक: कर्नाटक सरकार में मंत्री Priyank Kharge ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी आरएसएस की भूमिका, कार्यप्रणाली या जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, भाजपा तुरंत बचाव की मुद्रा में आ जाती है। उनके बयान ने एक बार फिर संघ और भाजपा को लेकर राजनीतिक बहस को हवा दे दी है।
सोशल मीडिया मंच X पर जारी अपने संदेश में खड़गे ने कहा कि भाजपा केवल आरएसएस की राजनीतिक शाखा की तरह काम करती है और संघ से जुड़े किसी भी सवाल पर उसकी प्रतिक्रिया अत्यधिक रक्षात्मक होती है। उन्होंने पूछा कि जिस संगठन का स्वतंत्रता आंदोलन में कोई प्रत्यक्ष योगदान नहीं रहा, वह आज देशभक्ति का सबसे बड़ा पैरोकार बनने का दावा कैसे कर सकता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने में दशकों का समय क्यों लगा।
खड़गे ने आरएसएस की संवैधानिक प्रतिबद्धताओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि संघ भारतीय संविधान के प्रति अपनी स्पष्ट स्थिति बताए और यह स्पष्ट करे कि वह B. R. Ambedkar द्वारा निर्मित संविधान को पूरी तरह स्वीकार करता है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने संगठन की प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता पर भी प्रश्न खड़े किए।
कर्नाटक मंत्री ने आरोप लगाया कि आरएसएस के पंजीकरण, कर व्यवस्था और संगठनात्मक जवाबदेही जैसे मुद्दों पर चर्चा होते ही भाजपा आक्रामक प्रतिक्रिया देती है। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि भाजपा और आरएसएस के बीच संबंध केवल वैचारिक नहीं बल्कि संरचनात्मक भी हैं।
खड़गे के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि भाजपा या आरएसएस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि यह बयान आने वाले दिनों में सियासी आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर सकता है। कर्नाटक सहित राष्ट्रीय राजनीति में संघ और भाजपा की भूमिका को लेकर बहस एक बार फिर केंद्र में आ गई है, जहां दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ मैदान में उतरते नजर आ रहे हैं।







