दरभंगा: पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आरा के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में हुई मौत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यदि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाए जाने की पुष्टि होती है तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। दरभंगा में मीडिया से बातचीत के दौरान अश्विनी चौबे ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण कर दिया था और उसके बाद उस पर गोली चलाई गई, तो यह बेहद गंभीर मामला है। ऐसे मामले में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
अश्विनी चौबे ने कहा कि यह अलग बात है कि संबंधित व्यक्ति पर पहले हथियार लहराने या फायरिंग करने के आरोप रहे हों, लेकिन उनकी जानकारी में सरकार की नीति किसी भी अपराधी का एनकाउंटर करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और हर व्यक्ति को न्यायिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई का अधिकार मिलना चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भरत तिवारी अपने क्षेत्र में सामाजिक गतिविधियों से भी जुड़े हुए थे। उनके अनुसार, मृतक बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों के पुनर्वास और ऊंचे स्थान पर जमीन उपलब्ध कराने की मांग को लेकर प्रशासन से लगातार संघर्ष कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि लंबे समय से मांगों पर सुनवाई नहीं होने के कारण वह मानसिक तनाव में भी रहता था।
अश्विनी चौबे ने बताया कि वह इन दिनों पार्टी कार्यक्रमों में व्यस्त हैं, लेकिन 22 जून को बिलौटी गांव जाकर मृतक के परिजनों से मुलाकात करेंगे और पूरे मामले की जानकारी लेंगे। अश्विनी चौबे ने कहा कि भरत तिवारी एक सेवानिवृत्त पुलिस हवलदार के पुत्र थे और यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह साबित होता है कि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई, तो यह पुलिस द्वारा हिंसा और अपराध को बढ़ावा देने जैसा माना जाएगा। अश्विनी चौबे ने कहा कि ऐसे मामलों में शामिल अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर कठोर दंड दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कानून और सरकार से ऊपर कोई नहीं है। चाहे कोई भी पद पर हो, यदि उसने गलत किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित परिवार की हर संभव मदद करनी चाहिए।







