गया: गया में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस के साथ-साथ पूरे समाज को भावुक कर दिया। चार साल पहले मंदिर से गायब हुआ एक मासूम जिस महिला को अपनी मां मानकर बड़ा हो रहा था, वह उसकी असली मां नहीं निकली। पुलिस ने जब बच्चे को उसके असली माता-पिता से मिलवाया तो वह उन्हें पहचान तक नहीं पाया। इस पूरे मामले ने अपहरण, ममता और मजबूरी की एक बेहद संवेदनशील कहानी को सामने ला दिया है। मामला औरंगाबाद के प्रसिद्ध ओबरा देवी मंदिर से जुड़ा है। वर्ष 2022 में मंदिर में भारी भीड़ के दौरान चार वर्षीय शिवा पांडे अचानक लापता हो गया था। परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
घटना के बाद परिजन पूरी तरह टूट चुके थे। पुलिस ने भी बच्चे की तलाश में काफी खोजबीन की, लेकिन उस समय कोई सफलता नहीं मिली। हाल के दिनों में गया पुलिस को सूचना मिली कि खिजरसराय इलाके में एक महिला के पास संदिग्ध परिस्थिति में एक बच्चा रह रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान पुलिस ने वहां से एक बच्चे को बरामद किया, जिसकी पहचान चार साल पहले गायब हुए शिवा पांडे के रूप में हुई। इस मामले का सबसे भावुक पहलू तब सामने आया, जब पुलिस ने बच्चे को उसके असली माता-पिता से मिलवाया। चार साल तक जिस महिला की गोद में बच्चा पला-बढ़ा, उसी को वह अपनी असली मां मानता रहा।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बच्चा शुरुआत में अपने असली माता-पिता को पहचान नहीं पा रहा था और लगातार उस महिला के पास जाने की जिद कर रहा था। एक तरफ बेटे को वापस पाने की खुशी थी, तो दूसरी तरफ माता-पिता के लिए यह दर्द भी था कि उनका बच्चा अब उन्हें भूल चुका है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार बच्चे की काउंसिलिंग कराई जा रही है, ताकि वह धीरे-धीरे अपने असली परिवार के साथ सामान्य रूप से जुड़ सके। पूछताछ के दौरान महिला ने पुलिस को बताया कि शादी के कई साल बाद भी उसकी कोई संतान नहीं हुई थी। इसी कारण उसके पति ने दूसरी शादी कर ली थी। महिला ने बताया कि वह इस बात से मानसिक रूप से टूट चुकी थी। बच्चा पाने की चाहत में वह अक्सर मंदिरों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाया करती थी। इसी दौरान वर्ष 2022 में ओबरा देवी मंदिर में उसकी नजर मासूम शिवा पर पड़ी और वह उसे अपने साथ लेकर फरार हो गई। महिला ने बच्चे को अपने बेटे की तरह पाला और कभी किसी को उस पर शक नहीं होने दिया।







