लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) बिल पास नहीं होने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस कभी भी महिलाओं के खिलाफ नहीं रही है और लंबे समय से महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने की मांग करती रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 के महिला आरक्षण कानून को भी कांग्रेस ने पूरा समर्थन देकर पारित कराया था।खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने उसी कानून में बदलाव के नाम पर नया संशोधन लाकर डिलिमिटेशन की शर्त जोड़ दी और कई विधेयकों को एक साथ जोड़कर पेश किया, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार की मंशा साफ है, तो मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के भीतर ही महिला आरक्षण लागू किया जा सकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने भी सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि महिला आरक्षण कानून पहले ही सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, इसलिए इसे 2029 के चुनाव से पहले लागू किया जाना चाहिए। उनका आरोप था कि सरकार डिलिमिटेशन के जरिए सीटों के बंटवारे को अपने हिसाब से तय करना चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने इसे रोक दिया। वहीं, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में महिला आरक्षण लागू करना चाहते हैं, तो मौजूदा कानून को ही लागू करें। उन्होंने नए बिल को देश के राजनीतिक और चुनावी ढांचे में बदलाव की कोशिश बताया और इसे संविधान पर हमला करार दिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे संघवाद और संविधान की जीत बताया। इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं।







