नई दिल्ली। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन बिल को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इन अहम विधेयकों पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने इस मुद्दे पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर चुकी है और अब कुछ और कहने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन और परिसीमन आयोग के गठन से संबंधित विधेयक सदन में पेश किए। प्रस्तावित संविधान संशोधन के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 तक करने का प्रावधान रखा गया है, जिससे 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जा सके। विधेयक के अनुसार, न केवल लोकसभा बल्कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित की जाएंगी। इसके साथ ही आरक्षित सीटों का निर्धारण रोटेशन के आधार पर किया जाएगा, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों को अवसर मिल सके। हालांकि विपक्ष ने परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को लेकर कड़ा विरोध जताया है। कई दलों ने इसे असंवैधानिक बताते हुए कहा कि इससे राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो सकता है। विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन परिसीमन के मौजूदा प्रस्तावों पर सहमत नहीं हैं। संसद में इस मुद्दे पर बहस के दौरान माहौल लगातार गर्म बना हुआ है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बहस देखने को मिल सकती है, जिससे देश की राजनीति में बड़ा बदलाव संभव है।







