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लोकतंत्र का महापर्व: पांच राज्यों में रिकॉर्ड मतदान, जनता ने दिखाया जबरदस्त उत्साह

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The grand festival of democracy: Record voting in five states, people showed tremendous enthusiasm

असम, केरल और पुडुचेरी में टूटा मतदान का रिकॉर्ड, महिला और युवा मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी

असम: देश के लोकतंत्र के महापर्व में एक बार फिर जनता का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कल पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने मताधिकार का जमकर इस्तेमाल किया। कई राज्यों में रिकॉर्ड तोड़ मतदान दर्ज किया गया, जो लोकतंत्र की मजबूती का स्पष्ट संकेत है। सबसे पहले बात करें असम की, जहां 1950 में राज्य गठन के बाद अब तक का सबसे अधिक मतदान दर्ज किया गया। राज्य में 85.91 प्रतिशत वोटिंग हुई, जिसने 2016 के 84.7 प्रतिशत के पिछले रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।

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126 सीटों पर 41 राजनीतिक दलों के 722 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। 35 में से 26 से अधिक जिलों में 80 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ। साउथ सलमारा-मनकचर जिले में सबसे ज्यादा 95.56 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि वेस्ट कार्बी आंगलॉन्ग में सबसे कम 75.25 प्रतिशत वोटिंग हुई। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम बताया। वहीं केरल में भी मतदाताओं का उत्साह देखने लायक रहा। यहां 78.27 प्रतिशत मतदान हुआ, जो पिछले 39 वर्षों में दूसरा सबसे अधिक है। 1987 में राज्य में 80.54 प्रतिशत का रिकॉर्ड मतदान हुआ था।

140 सीटों वाले केरल में करीब 2.6 करोड़ मतदाताओं ने 883 उम्मीदवारों के बीच अपने प्रतिनिधि का चयन किया। कोझिकोड में सबसे ज्यादा 81.32 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि पथनमथिट्टा में सबसे कम 70.76 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। राजनीतिक दलों के नेताओं ने महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी और मतदाता सूची के अपडेट को इसका प्रमुख कारण बताया। इधर केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी ऐतिहासिक मतदान देखने को मिला। यहां 89.87 प्रतिशत वोटिंग हुई, जो आजादी के बाद अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। इससे पहले 2006, 2011 और 2016 के चुनावों में करीब 85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। कुल मिलाकर, इन राज्यों में रिकॉर्ड मतदान ने यह साबित कर दिया है कि देश की जनता लोकतंत्र के प्रति न केवल जागरूक है, बल्कि सक्रिय रूप से अपनी भागीदारी भी सुनिश्चित कर रही है। अब सभी की निगाहें मतगणना के दिन पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि जनता ने किसे सत्ता की कमान सौंपी है।