Home राष्ट्रीय महिला आरक्षण विधेयक लागू करने के प्रस्ताव पर इसी माह संसद की...

महिला आरक्षण विधेयक लागू करने के प्रस्ताव पर इसी माह संसद की अलग से बैठक बुलाई जा सकती है’

57
0
A separate meeting of Parliament may be called this month on the proposal to implement the Women's Reservation Bill.

नयी दिल्ली। सरकार ने गुरुवार को राज्य सभा में संकेत दिया कि वह महिला आरक्षण विधेयक-2023 को लागू करने का संकल्प पारित कराने के लिए दो-तीन सप्ताह के अंदर ही संसद की बैठक बुला सकती है जबकि विपक्ष चाहता है कि इस मुद्दे पर काई कार्यवाही अब कुछ राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों में चल रहे विधान सभा चुनाव के बाद ही की जानी ठीक रहेगी।
यह मुद्दा राज्य सभा में अपराह्न दो बजे गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के आंध प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक 2026 को चर्चा और पारित कराने का प्रस्ताव रखने के लिए खड़े होते ही उठा। कांग्रेस के जयराम रमेश ने सभापति सीपी राधाकृष्णन के माध्यम से जानना चाहा कि सरकार सदन की कार्यवाही के विषयों के बारे में क्या सोचती है। क्या सदन को कल भी चलाया जाएया या इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित किया जाएगा।

आसन के निर्देश पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सदन में आज आंध्र प्रदेश संबंधी विधेयक के बाद लोक सभा से पारित हो कर आये जन विश्वास विधेयक को रखा जाएगा। श्री रिजिजू ने इसी दौरान कहा, ” हम जल्दी ही दो-तीन सप्ताह के अंदर फिर मिलेंगे। इसका एक विशेष उद्येश्य है।” इस पर विपक्ष के नेता कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खरगे और श्री जयराम रमेश ने कहा कि सरकार विधान सभा चुनावों का लाभ लेने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने की यह चाल चल रही। उन्होंने मांग की कि इस के बारे में अब कोई भी बैठक 29 अप्रैल को विधान सभा चुनावों के आखिरी चरण का मतदान हो जाने के बाद बुलाया जाना चाहिए1 श्री रिजिजू ने कहा कि उन्होंने इस बारे में कांग्रेस सहित विपक्ष के सभी दलों के साथ पत्र लिखा है और चर्चा की है। विपक्ष के नेता ने पत्र का जवाब दिया है।

GNSU Admission Open 2026

उन्होंने विपक्ष से राजनीति में न पड़ कर सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि ‘ सरकार ने देश और महिलाओं के प्रति एक प्रतिबद्धता व्यक्त कर रखी है। उन्होंने कोई व्याख्या प्रस्तुत किये बिना कहा कि -सरकार समय से बंधी हुई है। समय बहुत कम है। इसका चुनावी राजनीति से कोई संबंध नहीं है।’ श्री खरगे ने संसदीय कार्यमंत्री के जवाब में कहा कि उन्होंने उनके पत्र के जवाब में अपनी बात रख दी है। उन्होंने कहा, ”आप सर्वदलीय बैठक बुलाइए हम विधेयक के पक्ष में है। हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं। हमारे समर्थन से ही यह विधेयक सर्व सम्मति से पारित हुआ है।” उन्होंने सरकार पर इसके माध्यम से राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को यही करना था तो वह इस सत्र में पहले ही यह काम कर सकती थी। विपक्ष के नेता ने कहा, ”चुनाव के बाद बैठक बुलाइए , हम इसके पक्ष में हैं।” आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने भी विपक्ष के नेता की बात का समर्थन किया। सदन के नेता और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि श्री जयराम रमेश जो बात उठाई थी, संसदीय कार्य मंत्री उसका सटीक जवाब दे चुके हैं।

उन्होंने कहा कि कोई बिल या प्रस्ताव कब लाया जाना है इस काम के लिए सरकार अपने आप में सक्षम है। श्री नड्डा ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा, “जहां तक महिला आरक्षण विधेयक का श्रेय लेने की बात है तो जो काम आप 30 साल तक नहीं कर सके, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन में कर दिया। आप हर बात को राजनीति की दृष्टि से देखते हैं। सरकार संसद की बैठक बुलाने में सक्षम है।” इस पर श्री खड़गे ने इस पर सवाल किया , ”सरकार ने इस विधेयक के पारित होने के बाद इसे 30 महीने इसका तकिया बना बना कर क्यों रखा ?” वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष पर दोहरा मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि क्या वे महिला आरक्षण के विरुद्ध हैं। संविधान के 106वें संशोधन के रूप में पारित ‘नारी शक्ति वंदन विधेयक-2023’ में विधायिकाओं की एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने का प्रावधान है। इसे 2029 के आम चुनाव में लागू किये जाने की संभावना है।