
उत्तर प्रदेश: Sanjay Nishad ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले आरक्षण के मुद्दे को अपनी राजनीति का केंद्र बताते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी का Bharatiya Janata Party के साथ गठबंधन इसी अहम मुद्दे पर आधारित है। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा से निषाद समुदाय और विमुक्त जनजातियों के अधिकारों को सुनिश्चित करना रही है, और आरक्षण उनके एजेंडे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निषाद ने Samajwadi Party पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी इसलिए छोड़ी क्योंकि वहां उनकी मांगों को अनदेखा किया गया। उनके अनुसार, समाजवादी पार्टी ने आरक्षण जैसे गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस पहल नहीं की, जिससे उन्हें अलग होने का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि ताल-घाट, नदियों से जुड़े मुद्दे और समुदाय की शिक्षा जैसे विषय केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं और इन पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
भाजपा के साथ अपने संबंधों पर बात करते हुए निषाद ने स्वीकार किया कि पहले यह धारणा थी कि पार्टी आरक्षण के खिलाफ है, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। उन्होंने उच्च वर्गों को 10% और महिलाओं को 33% आरक्षण देने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे भाजपा की सोच में बदलाव साफ दिखाई देता है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि अब भाजपा को अपने वादों को पूरा करते हुए निषाद समुदाय के लिए भी आरक्षण लागू करना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी फिलहाल भाजपा के साथ मजबूती से खड़ी है, लेकिन भविष्य की दिशा आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी के रुख पर निर्भर करेगी। निषाद ने विश्वास जताया कि भाजपा इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी और उनके समुदाय को न्याय मिलेगा।






