नयी दिल्ली: यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों को लेकर देशभर में विवाद जारी है। इन नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने इन नियमों के कुछ प्रावधानों पर रोक लगाते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी से जवाब मांगा था। मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में होनी है, जहां इससे पहले 29 जनवरी को कोर्ट ने यूजीसी के नए नियमों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
अदालत ने केंद्र सरकार और यूजीसी को 19 मार्च तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। दरअसल पिछली सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने नियमों की कुछ धाराओं पर गंभीर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसके समाज पर खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। खासतौर पर नियम 3(1)(सी) के तहत जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को लेकर कोर्ट ने आपत्ति जताई थी। इस प्रावधान में भेदभाव को केवल SC, ST और OBC वर्ग तक सीमित बताया गया था, जिसे कोर्ट ने ‘गैर-समावेशी’ मान
मुख्य न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर विशेषज्ञ समिति से विचार करने की भी सलाह दी थी, ताकि सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नियम बनाए जा सकें। वहीं इन नियमों के विरोध में देशभर में प्रदर्शन भी देखने को मिले जहां ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन, भीम आर्मी और अन्य संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। पटना में डाकबंगला चौराहा पर विभिन्न संगठनों ने ऑल इंडिया फोरम फॉर इक्विटी के बैनर तले प्रदर्शन किया और यूजीसी के नए नियमों को वापस लेने की मांग की। अब सबकी नजरें सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यूजीसी के नए नियमों का भविष्य क्या होगा।







