Home राष्ट्रीय होर्मुज पर ईरान-भारत समझौता, वैश्विक शक्तियों में हलचल

होर्मुज पर ईरान-भारत समझौता, वैश्विक शक्तियों में हलचल

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Iran-India agreement on Hormuz, stirs global powers

नयी दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध के 18वें दिन आते-आते जियोपॉलिटिक्स बहुत बदल चुकी है। इसका सबसे बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य है, जिसने दुनिया भर में कच्चे तेल और एलपीजी-एलनजी की सप्लाई चेन तोड़ दिया है।होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्र से कम से कम तीन भारतीय एलपीजी (शिवालिक और नंदा देवी) और तेल टैंकर (जग लाडकी) सुरक्षित निकल आए हैं।

इसके लिए भारत ने न सिर्फ ईरान के साथ कूटनीतिक चर्चा की है, बल्कि अपने जहाजों और अपने नागरिकों को सुरक्षित लाने के लिए होर्मुज इलाके में इंडियन नेवी के जंगी जहाजों को भी तैनात कर रखे हैं और इनको सुरक्षा घेरे में भारतीय समुद्र तक लाया भी जा रहा है।अमेरिकी मीडिया की मानें तो होर्मुज की स्थिति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बहुत ही ज्यादा चिढ़े हुए हैं। क्योंकि, उन्होंने लाख कोशिशें कर लीं, लेकिन न तो नाटो सहयोगी और न तो कोई और होर्मुज में अपनी नेवी उतारने का साहस जुटा सका।

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सीएनएन जैसी अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग के अनुसार इस मसले पर अमेरिका अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है, क्योंकि ट्रंप नाटो और अपने अन्य सहयोगियों पर बार-बार भड़क रहे हैं। ब्लूमबर्ग और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट भी जापान और ऑस्ट्रेलिया के मुंह फेरने की ओर इशारा कर रहे हैं।यूरोप और यूके मीडिया की रिपोर्टिंग से भी पता चलता है कि वह भारतीय कूटनीति से भौंचक्के नजर आ रहे हैं। बीबीसी भारत की होर्मुज सफलता को ‘तर्क और तालमेल’ वाला मॉडल बता रहा है।इसकी रिपोर्ट में होर्मुज से भारतीय टैंकरों के सुरक्षित निकलने और ईरान के साथ-साथ अमेरिका और इजरायल के साथ संतुलित तालमेल बनाए रखने का जिक्र है, जबकि एलपीजी की वजह से इसे घरेलू स्तर पर बहुत ज्यादा दबाव झेलना पड़ रहा है।