
नयी दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार और RBI से पूछा कि मृत लोगों के बैंक खातों की जानकारी उनके वारिसों को क्यों नहीं दी जा सकती, ताकि वे बिना दावा की गई राशि तक पहुंच सकें। जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली बेंच 2022 में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो निवेशकों और जमाकर्ताओं की बिना दावा की गई रकम से संबंधित है, जो उनके वैध वारिसों को उपलब्ध नहीं हो पाती।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा, समस्या तब खड़ी होती है जब मृत व्यक्ति के वारिसों को पता ही नहीं होता कि कितनी धनराशि बिना दावे के पड़ी है। केंद्र ने डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड के बारे में बताया, जिसमें 10 वर्षों तक बिना दावा की गई राशि ट्रांसफर कर दी जाती है और इसका उपयोग जन-जागरूकता और वित्तीय साक्षरता योजनाओं के लिए किया जाता है। कहा कि याचिका इस ट्रांसफर को चुनौती नहीं देत
।अगर वास्तविक वारिस आता है, तो उसे फंड से राशि वापस कर दी जाती है। पीठ ने केंद्र और आरबीआई को 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा। इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई को होगी।






