नयी दिल्ली: देश में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पैसिव यूथेनेशिया (इच्छा मृत्यु) को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। 31 वर्षीय हरीश राणा को इस प्रक्रिया के तहत मृत्यु की अनुमति मिल सकती है। इसके लिए दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) ने एक विशेष मेडिकल कमिटी का गठन किया है, जो मरीज की स्थिति का आकलन कर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया और देखभाल को लेकर सुझाव देगी।
सूत्रों के अनुसार, हरीश राणा को जल्द ही गाजियाबाद से एम्स में शिफ्ट किया जा सकता है। फिलहाल उन्हें पैलेटिव केयर यूनिट में रखने की तैयारी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि पैसिव यूथेनेशिया का मतलब तुरंत इलाज बंद कर देना या मरीज को भर्ती होते ही जीवनरक्षक व्यवस्था हटाना नहीं होता। इस प्रक्रिया में कई मेडिकल और नैतिक पहलुओं का गहन मूल्यांकन किया जाता है।
जानकारी के मुताबिक हरीश राणा पिछले करीब 13 वर्षों से गंभीर अवस्था में हैं। हालांकि वह खुद से सांस ले पा रहे हैं और वेंटिलेटर पर नहीं हैं। उनके शरीर के कई पैरामीटर सामान्य बताए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें बाहरी न्यूट्रिशन सपोर्ट दिया जा रहा है और यूरिन के लिए कैथेटर लगाया गया है।
एम्स के विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले मेडिकल कमिटी मरीज की स्थिति का विस्तृत आकलन करेगी। इसके बाद पैलेटिव केयर के जरिए उनके दर्द और असहजता को नियंत्रित करने की कोशिश की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीज को किसी प्रकार की पीड़ा न हो और गरिमा के साथ जीवन की अंतिम अवस्था तक देखभाल दी जा सके।
डॉक्टरों का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया में समय लगता है और इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाता है। एम्स ट्रॉमा सेंटर में पहले भी गंभीर दुर्घटनाओं के ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं, जहां मरीज लंबे समय तक गंभीर हालत में रहते हैं। ऐसे मरीजों को अक्सर अत्यधिक दर्द, कमजोरी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी देखभाल और उपचार बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है।







