नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक और भारतीय शेयर बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स 1352.74 अंक यानी 1.71 प्रतिशत टूटकर 77,566.16 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 422.40 अंक या 1.73 प्रतिशत गिरकर 24,028.05 पर आ गया। बाजार में इस तेज गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल माना जा रहा है।
दरअसल, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इजरायल द्वारा तेहरान के एक तेल डिपो को निशाना बनाए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख और ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।
इस युद्ध का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो जून 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका और कुवैत, यूएई तथा इराक जैसे देशों द्वारा उत्पादन में कटौती ने बाजार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। कतर के ऊर्जा मंत्री ने तो यहां तक चेतावनी दी है कि तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की लगातार बिकवाली भी बाजार पर दबाव बना रही है। शुक्रवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 9,459 करोड़ रुपये की भारी निकासी की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की, लेकिन दबाव बरकरार रहा।
वैश्विक बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। एशियाई और अमेरिकी बाजारों में चौतरफा बिकवाली के साथ भारत का वोलैटिलिटी इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ भी 21 प्रतिशत उछलकर 24.04 पर पहुंच गया, जो निवेशकों में बढ़ते डर और अनिश्चितता को दर्शाता है।







