
नयी दिल्ली: दिल्ली की नई आबकारी नीति से जुड़े कथित घोटाले के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर कर निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। जांच एजेंसी का कहना है कि निचली अदालत का आदेश तथ्यों और सबूतों के आधार पर सही नहीं है।
सीबीआई ने हाईकोर्ट में दायर अपनी अपील में कहा कि दिल्ली की आबकारी नीति से जुड़ा मामला देश के सबसे बड़े कथित घोटालों में से एक है और इसमें भ्रष्टाचार के स्पष्ट संकेत मिलते हैं। एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि निचली अदालत ने आरोपियों को बिना पर्याप्त सुनवाई के ही बरी कर दिया और जांच के दौरान जुटाए गए महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर दिया। सीबीआई के अनुसार, उनके पास ऐसे कई दस्तावेज और गवाह हैं जो केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ मामले को मजबूत करते हैं।
जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर रिश्वत देने वाले लोग कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान भी निजी विमानों से यात्रा करते रहे, जबकि उस समय निजी उड़ानों पर प्रतिबंध था। सीबीआई का कहना है कि यह गतिविधियां इस मामले में संदिग्ध लेनदेन और प्रभाव का संकेत देती हैं।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह दिल्ली की एक विशेष अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि सीबीआई द्वारा पेश किए गए सबूत प्रथम दृष्टया किसी साजिश, पक्षपात या संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। 598 पन्नों के अपने विस्तृत आदेश में अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड से यह प्रतीत होता है कि नई आबकारी नीति परामर्श, संवाद और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत तैयार की गई थी।
इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत में हुई थी, जहां मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता सहित करीब 20 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज था। अब सीबीआई की अपील के बाद इस बहुचर्चित मामले में कानूनी लड़ाई का अगला चरण दिल्ली हाईकोर्ट में देखने को मिलेगा।






