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झारखंड के नगर निकायों को 3367 करोड़ रुपये, शहरों में तेज होगा विकास

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Jharkhand's municipal bodies will get Rs 3,367 crore, which will accelerate development in cities.

झारखंड में नगर निकाय चुनाव के बाद अब शहरी विकास से जुड़े लंबित कार्यों को आगे बढ़ाने की उम्मीद बढ़ गयी है. लंबे समय से लंबित निकाय चुनाव संपन्न होने से राज्य के शहरों के विकास के लिए बड़ी राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है. राज्य के नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों को 15वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2021 से 2026 तक की अवधि में करीब 3367 करोड़ रुपये मिलने का प्रावधान है. इसमें से कुछ राशि राज्य को मिली है. लेकिन, राज्य में निकाय चुनाव नहीं होने के कारण आयोग की अनुशंसा पर मिलने वाला अनुदान रुक गया था. वर्तमान में राज्य सरकार का 1600 करोड़ रुपये से अधिक पर दावा है. नये मेयर, अध्यक्ष और पार्षदों के निर्वाचित होने के बाद राज्य सरकार वित्त आयोग की अनुशंसा पर मिलने वाले अनुदान पर दावा पेश करेगी.

अनुदान मिलने से तेज होगा शहरी विकास

राज्य में लंबे समय तक कई शहरी निकायों में निर्वाचित बोर्ड नहीं था और प्रशासकों के माध्यम से कामकाज चल रहा था. इस कारण योजनाओं की प्राथमिकता तय करने और वित्त आयोग की राशि के प्रभावी उपयोग में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही थीं. नगर विकास विभाग के अनुसार, अब नये जनप्रतिनिधियों के आने के बाद नगर निकाय अपने क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार विकास योजना तैयार करेंगे. इसी के आधार पर वित्त आयोग की राशि का उपयोग किया जायेगा. झारखंड के 48 नगर निकायों (नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत) को वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत जनसंख्या, क्षेत्रफल और अन्य मानकों के आधार पर राशि आवंटित की जाती है. इस राशि का उपयोग शहरों की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए किया जाता है.

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बुनियादी सुविधाओं पर खर्च होगी राशि

नगर विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 15वें वित्त आयोग की राशि का उपयोग मुख्य रूप से पेयजल व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, सीवरेज, नाली निर्माण, वर्षा जल निकासी और अन्य शहरी आधारभूत संरचनाओं के विकास में किया जायेगा. इससे शहरों में नागरिक सुविधाओं की स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी.15वें वित्त आयोग की गाइडलाइन के अनुसार, इस राशि का एक हिस्सा टाइड फंड के रूप में दिया जाता है. इसका उपयोग पेयजल, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन जैसे निर्धारित मदों में ही करना होता है. वहीं, अनटाइड फंड का उपयोग नगर निकाय अपने क्षेत्र की प्राथमिकताओं के अनुसार अन्य विकास कार्यों में कर सकते हैं.

केंद्र से किस्तों में मिलती है राशि

वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार राज्यों को समय-समय पर किस्तों में अनुदान जारी करती है. इसके बाद राज्य सरकार यह राशि नगर निकायों को उपलब्ध कराती है. इसके लिए निकायों को ऑडिट, उपयोगिता प्रमाणपत्र और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े मानकों का पालन करना होता है. इस राशि का सही तरीके से उपयोग होने पर शहरों में जलापूर्ति, सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सेवाओं में बड़ा सुधार हो सकता है.

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