
नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के सातवें दिन हालात और गंभीर हो गए हैं। लगातार हमलों और कई देशों में हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण हजारों भारतीय नागरिक अपने घर लौटने में असमर्थ हैं। रिपोर्टों के अनुसार करीब 12 हजार भारतीयों ने भारत सरकार से सुरक्षित वापसी के लिए मदद की गुहार लगाई है और क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावासों से लगातार संपर्क कर रहे हैं।
सबसे अधिक परेशानी संयुक्त अरब अमीरात में देखी जा रही है, जहां ईरान की ओर से बढ़ते हमलों के बाद हवाई सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कई हवाई अड्डों से सामान्य उड़ानें रद्द हो चुकी हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में भारतीय यात्री वहां फंस गए हैं। इनमें वे लोग भी शामिल हैं जो पर्यटन, नौकरी या किसी अन्य देश की यात्रा के लिए यूएई पहुंचे थे। इसके अलावा कई भारतीय छात्र भी संकट में फंस गए हैं क्योंकि क्षेत्र के कई शिक्षण संस्थानों ने सुरक्षा कारणों से कक्षाएं बंद कर दी हैं या पढ़ाई को ऑनलाइन कर दिया है।
बताया जा रहा है कि युद्ध शुरू होने के शुरुआती दिनों में ही करीब 22 हजार भारतीयों ने भारत सरकार से संपर्क कर घर लौटने की इच्छा जताई थी। हालांकि पिछले कुछ दिनों में विशेष और अस्थायी उड़ानों के माध्यम से करीब 10 हजार भारतीयों को सुरक्षित भारत लाया जा चुका है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में फंसे हुए हैं।
कुछ भारतीय नागरिक जमीन के रास्ते भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। कई लोग यूएई और ओमान की सीमा पार कर मस्कट हवाई अड्डे से भारत लौटने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सीमाओं पर भारी भीड़ के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय ने सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है और भारतीय दूतावासों को नागरिकों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं। लगातार बदलते हालात के बीच अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि भारत सरकार कब व्यापक निकासी योजना की घोषणा करती है।






