
नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात और ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद वैश्विक तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसी बीच भारत ने संतुलित लेकिन स्पष्ट कूटनीतिक रुख अपनाते हुए हिंसा रोकने की अपील की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत कर मौजूदा हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त की और तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने तथा शांति बहाल करने पर जोर दिया।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि युद्ध का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ता है और निर्दोष लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए समाधान का समर्थक रहा है।
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की आपात बैठक बुलाई गई। बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात, वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और संभावित आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में एयरस्पेस बंद होने से कई भारतीय यात्री फंस गए हैं और सरकार उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
बैठक में विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर भी चिंता जताई गई, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि इस मार्ग में बाधा आती है, तो इसका सीधा असर ऊर्जा कीमतों और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
भारत ने ईरान और इज़राइल सहित सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की है। सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे की रणनीतिक और मानवीय कार्रवाई के लिए तैयार है।






