पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज 75 वर्ष के हो गए। उनके 75 वर्ष होने पर बिहार की राजधानी स्थित पार्टी कार्यालय से लेकर जिले तक कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने केक काटकर उनका जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर मंत्री अशोक चौधरी के आवास पर रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया। साथ ही शाम में रविंद भवन में नीतीश कुमार को जीवनी पर आधारित काफी टेबल बुक मीर – ए – कारवां का विमोचन किया जाएगा। आज हम बात करेंगे उस चेहरे की, जिन्होंने बख्तियारपुर से दिल्ली तक का लंबा और प्रभावशाली सफर तय किया।
1 मार्च 1951 को बख्तियारपुर में जन्मे नीतीश कुमार ने पटना से लेकर दिल्ली तक का सफर किया। जरा नजर डालते हैं उनके राजनीतिक सफर पर स्वतंत्रता सेनानी कविराज रामलखन सिंह के पुत्र नीतीश कुमार ने पटना कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, जो आज राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना के नाम से जाना जाता है, वहां विद्युत अभियंत्रण की पढ़ाई की। 1970 के दशक में छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से जुड़कर उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वे कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य रहे, केंद्र सरकार में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे अहम पद संभाले, और 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने।
मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने सुशासन, कानून-व्यवस्था, सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। महिला सशक्तीकरण, पंचायतों में महिलाओं को आरक्षण और शराबबंदी जैसे निर्णयों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। करीब पांच दशकों के राजनीतिक अनुभव के साथ नीतीश कुमार आज भी बिहार की राजनीति के केंद्र में हैं। समर्थक उन्हें सुशासन का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक उनके बदलते राजनीतिक समीकरणों पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि बिहार की राजनीति में उनका नाम एक प्रभावशाली अध्याय के रूप में दर्ज है। आज नीतीश कुमार के जन्मदिन पर पूरे सूबे में कार्यकर्ता उत्साहित दिखाई दे रहे है। पार्टी के वरीय नेता मंत्री से लेकर प्रखंड स्तर के कार्यकर्ता भी सीएम नीतीश कुमार का जन्मदिन मना रहें है और उनकी लंबी उम्र की कामना कर रहें हैं।







