
कर्नाटक : कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के समर्थक विधायकों ने बेंगलुरु के एक निजी होटल में बैठक कर नेतृत्व परिवर्तन की मांग तेज कर दी है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में करीब 40 विधायक शामिल हुए और उन्होंने पार्टी आलाकमान से राज्य में नेतृत्व को लेकर चल रही अनिश्चितता को जल्द समाप्त करने की अपील की। हालांकि इस बैठक को आधिकारिक रूप से विधायक एच.सी. बालकृष्ण के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित मिलन समारोह बताया गया, लेकिन अंदरूनी चर्चा पूरी तरह मुख्यमंत्री पद को लेकर केंद्रित रही।
बैठक के बाद बालकृष्ण ने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति से पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जब विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में जाते हैं, तो लोगों द्वारा नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार सवाल पूछे जाते हैं, जिससे असहज स्थिति पैदा होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भविष्य और राजनीतिक स्थिरता के लिए शीर्ष नेतृत्व को जल्द निर्णय लेना चाहिए।
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस के सत्ता में आने के समय मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ता-साझाकरण का एक अनौपचारिक समझौता हुआ था, जिसके तहत ढाई वर्ष बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावना जताई गई थी। हालांकि इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे।
इस घटनाक्रम ने कर्नाटक कांग्रेस के भीतर शक्ति संतुलन और भविष्य की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आगामी बजट सत्र से पहले हुई इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजर कांग्रेस आलाकमान के अगले कदम पर टिकी है, जो राज्य की सियासत की दिशा तय कर सकता है।






