रांची। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर राज्य के वित्तीय हालात को लेकर बड़ा निशाना साधा है। बाबू लाला मरांडी ने मंगलवार को कहा कि झारखंड की वित्तीय हालत दिन-ब-दिन चिंताजनक होती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण कागज़ों पर भले ही संतुलित दिखता हो, लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी से सच्चाई नहीं छिप सकती। श्री मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार बजट पेश करने की तैयारी में है, पर राज्य की जनता महंगाई, बेरोज़गारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है। स्थिति इतनी विकट है कि एक भाई को अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए अपने बहन की शादी के गहने बेचने पड़ रहे हैं। शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा, ठेकेदारों का भुगतान लंबित है, जिससे विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। श्री मरांडी ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।
सरकारी अस्पताल बदहाल स्थिति में हैं, बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एम्बुलेंस की कमी के कारण ग्रामीण इलाकों में बहंगी और खटिया ही मरीजों को अस्पताल पहुंचाने का साधन बन रही है। कहीं एक गरीब पिता को एम्बुलेंस न मिलने के कारण अपने मासूम बच्चे का शव झोले में ले जाना पड़ रहा है। कानून-व्यवस्था और परिवहन व्यवस्था पर श्री मरांडी ने कहा कि यहां भी स्थिति भी बहुत बढ़िया नहीं है। पुलिसकर्मी कबाड़ हो चुके वाहनों से पेट्रोलिंग करने को मजबूर हैं। राजधानी रांची से लेकर धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह जैसे बड़े शहरों में आम जनता के लिए समुचित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का अभाव है। सिटी बस योजना फाइलों में ही सिमटी नजर आती है। श्री मरांडी ने कहा कि सरकार के क्रियाकलापों से ही लग रहा है कि बजट में आम जनता को निराशा हाथ लगने वाली है।







