Allegations of 'dealing' with patients in Bihar, GNM investigated for taking online payments for private nursing homes

छपरा: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सारण जिले के मशरक प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मशरक में कार्यरत एक जीएनएम पर अवैध रूप से संचालित निजी नर्सिंग होम में मरीज भेजने और इसके बदले डिजिटल माध्यम से भुगतान लेने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि संबंधित जीएनएम को फोनपे के माध्यम से राशि ट्रांसफर की गई। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार 12 जनवरी 2025, 15 जनवरी 2025 और 5 फरवरी 2025 को ₹500-₹500 की राशि ट्रांसफर किए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा कई बार नकद लेन-देन होने की भी बात कही जा रही है, हालांकि उसके संबंध में कोई ठोस प्रमाण या गवाह सामने नहीं आया है।

आरोप है कि सरकारी अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को कथित रूप से अवैध निजी नर्सिंग होम में इलाज के लिए भेजा जाता था। इस पूरे मामले ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बताया जाता है कि 26 मार्च 2025 को मशरक प्रखंड के बीडीओ पंकज कुमार और तत्कालीन सीएचसी प्रभारी डॉ. संजय कुमार ने संयुक्त रूप से निजी नर्सिंग होमों के खिलाफ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में जिओ हॉस्पिटल नामक संस्थान भी शामिल था, जिसे स्थानीय स्तर पर अवैध रूप से संचालित बताया जा रहा है।

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मामले को लेकर जदयू के प्रखंड अध्यक्ष रामाधार सिंह, उपमुखिया शिव कुमार यादव और समाजसेवी पप्पू सिंह समेत कई लोगों ने कठोर विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से मरीजों को निजी संस्थानों में भेजकर कथित रूप से कमीशन लिया जा रहा है, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों ने पारदर्शी जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में आम जनता का विश्वास बना रहे।