नयी दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण केवल किसी एक संगठन या विचारधारा का काम नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक समाज के सभी वर्ग—युवा, महिलाएं, किसान, मजदूर, बुद्धिजीवी और उद्यमी—एकजुट होकर देशहित में कार्य नहीं करेंगे, तब तक समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी विविधता और सामाजिक एकता में निहित है। उन्होंने समाज में आपसी विश्वास, समन्वय और संवाद को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि देश को आगे बढ़ाने के लिए केवल सरकार या किसी एक संस्था पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। नागरिकों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना होगा और सकारात्मक भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण का अर्थ केवल भौतिक विकास या आर्थिक प्रगति नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करना भी उतना ही आवश्यक है। भागवत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने कौशल और ऊर्जा का उपयोग समाज के उत्थान के लिए करें। साथ ही, उन्होंने शिक्षा और संस्कार को मजबूत राष्ट्र की आधारशिला बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक समरसता पर विशेष बल देते हुए कहा कि मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। उन्होंने सभी संगठनों और समुदायों से आग्रह किया कि वे मिलकर ऐसे वातावरण का निर्माण करें, जिसमें सहयोग और सहभागिता की भावना प्रबल हो। भागवत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में सामाजिक एकता और सहभागिता को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।







