
जयपुर। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य एवं केन्द्र सरकार से प्रदेश में युवाओं और बच्चों में बढ़ते कार्डियक अरेस्ट एवं अचानक मौतों के मुद्दे पर एक उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक जांच कमेटी बनाये जाने की मांग की है। श्री गहलोत ने गुरुवार को अपने बयान में कहा कि राज्य और केंद्र सरकार को राजनीति से ऊपर उठकर इस मुद्दे पर एक उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक जांच कमेटी बनायी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का हक है कि इन मौतों का असली कारण क्या है, ताकि भविष्य में अनमोल जिंदगियां बचायी जा सकें।
उन्होंने कहा कि कल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली एवं अन्य विधायकों ने प्रदेश में युवाओं और बच्चों में बढ़ते ‘कार्डियक अरेस्ट’ एवं अचानक मौतों पर जो चिंता जताई है, जो अत्यंत गंभीर है। फिट दिखने वाले नौजवानों और डॉक्टरों की ऐसी आकस्मिक मृत्यु समाज में एक गहरे डर और संदेह को जन्म दे रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एस्ट्राजेनेका (कोविशील्ड) जैसी वैक्सीन के ‘रेयर साइड इफेक्ट्स’ (जैसे टीटीएस) पर चर्चा हो चुकी है।
यद्यपि आईसीएमआर की हालिया रिपोर्ट (जुलाई 2025) में सीधा संबंध नहीं पाया गया है, लेकिन ‘लॉन्ग कोविड’ और ‘वैक्सीन’ के हृदय तंत्र पर प्रभाव को लेकर दुनिया भर में गहन शोध जारी हैं। इस धुंध को साफ करना सरकार की जिम्मेदारी है। श्री गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 2023 के बजट में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) में सेंटर फोर पोस्ट-रिहेबिलिटेशन की घोषणा की थी, ताकि ऐसे ही विषयों पर शोध हो सके। उन्होंने कहा कि लेकिन दुख है कि वर्तमान सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं बढ़ाये। सरकार इसे ‘सामान्य’ बताकर पल्ला झाड़ नहीं सकती।






