नयी दिल्ली: कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के बयान के बाद सियासी माहौल गरमा गया है। अय्यर ने खुद को “गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी” बताते हुए कहा कि वह “राहुलवादी नहीं” हैं। उनके इस बयान पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है।
रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगातार कमजोर होती जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस, जो कभी परिपक्व और मजबूत नेताओं के लिए जानी जाती थी, अब नेतृत्व संकट से जूझ रही है। रिजिजू ने यह भी कहा कि भाजपा में लगातार चुनाव हारने वाले नेता को लंबे समय तक नेतृत्व की जिम्मेदारी नहीं दी जाती, जबकि कांग्रेस में ऐसा नहीं हो रहा है। उनका यह बयान कांग्रेस की चुनावी पराजयों और नेतृत्व को लेकर उठते सवालों के बीच आया है।
यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अय्यर ने केरल की राजनीति पर टिप्पणी करते हुए पिनारयी विजयन के नेतृत्व वाली वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार की उपलब्धियों की सराहना की और उसके सत्ता में लौटने की संभावना जताई। हालांकि, उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की जीत की इच्छा भी व्यक्त की।
अय्यर के बयान से असहज हुई कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से खुद को उनकी टिप्पणी से अलग कर लिया और कहा कि यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है। इसके जवाब में अय्यर ने कहा कि वह अभी भी पार्टी के सदस्य हैं और अपनी वैचारिक पहचान स्पष्ट करने का उन्हें अधिकार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद कांग्रेस के भीतर वैचारिक और नेतृत्व संबंधी मतभेदों को उजागर करता है। आने वाले चुनावों से पहले इस तरह के बयान पार्टी की एकजुटता और रणनीति पर असर डाल सकते हैं, जिससे सियासी समीकरण और अधिक दिलचस्प हो गए हैं।







