नयी दिल्ली: अहमदाबाद प्लेन क्रैश मामले में मुआवजे को लेकर नया विवाद सामने आया है। एयर इंडिया ने पीड़ित परिवारों को फाइनल सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है, लेकिन परिवारों के वकील चक एन. चिओनुमा ने उन्हें फिलहाल इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने की सलाह दी है। उनका कहना है कि जब तक AIP (एयरक्राफ्ट इन्वेस्टिगेशन प्रोसेस) का पूरा डेटा सामने नहीं आ जाता, तब तक किसी भी तरह के कानूनी अधिकार छोड़ना पीड़ित परिवारों के हित में नहीं होगा।
वकील के अनुसार, एयरलाइन द्वारा दिए गए सेटलमेंट डॉक्यूमेंट में एक महत्वपूर्ण शर्त शामिल है। इस शर्त के तहत, यदि परिवार मुआवजा स्वीकार कर लेते हैं और दस्तावेज पर साइन करते हैं, तो वे भविष्य में एयर इंडिया, विमान निर्माता, ऑपरेटर या किसी भी संबंधित पक्ष के खिलाफ अदालत में केस नहीं कर सकेंगे। इसका मतलब यह होगा कि जांच पूरी होने से पहले ही परिवार अपने सभी कानूनी अधिकार खो देंगे।
चक चिओनुमा ने बताया कि कुछ परिवारों को पहले ही सेटलमेंट प्रस्ताव मिल चुका है, लेकिन उन्होंने उन्हें इसे स्वीकार न करने की सलाह दी है। उनका तर्क है कि जांच पूरी होने और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक नुकसान कितना हुआ है और किस पक्ष की जिम्मेदारी है। ऐसे में जल्दबाजी में समझौता करना उचित नहीं होगा।
इस बीच, एयर इंडिया ने कहा है कि वह पीड़ित परिवारों के साथ संवेदनशीलता और सम्मान के साथ काम कर रही है। एयरलाइन पहले ही मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपये की अंतरिम सहायता दे चुकी है। इसके अलावा, टाटा समूह द्वारा स्थापित AI-171 मेमोरियल और वेलफेयर ट्रस्ट के माध्यम से प्रत्येक परिवार को 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सहायता देने की प्रक्रिया जारी है।
यह मामला अब जांच रिपोर्ट और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण पर निर्भर करेगा, जिससे पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद है।







