Home बिहार कीट प्रबंधन योजना के तहत किसानों को अनुदानित दर पर कीटनाशी छिड़काव...

कीट प्रबंधन योजना के तहत किसानों को अनुदानित दर पर कीटनाशी छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है : रामकृपाल

146
0
Under the Pest Management Scheme, farmers are being provided the facility of spraying insecticides at subsidized rates: Ramkripal

पटना। बिहार के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने सोमवार को कहा कि कीट प्रबंधन योजना के तहत किसानों को अनुदानित दर पर कीटनाशी छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उद्यानिक फसलों में समय पर कीट-व्याधि का प्रबंधन सुनिश्चित हो सके। श्री यादव ने बयान जारी कर कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य में बगीचों एवं फसलों में कीट प्रबंधन योजना को प्रभावी रूप से संचालित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत किसानों को अनुदानित दर पर कीटनाशी छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उद्यानिक फसलों में समय पर कीट-व्याधि का प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।

इससे न केवल फसलों की उत्पादकता में वृद्धि होगी, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार आएगा। कृषि मंत्री ने बताया कि लीची फसल में कीट-व्याधि प्रबंधन के लिये 75 प्रतिशत अनुदान पर प्रथम एवं द्वितीय छिड़काव की सुविधा दी जा रही है। इसके अंतर्गत प्रथम छिड़काव के लिए 162 रुपए प्रति वृक्ष तथा द्वितीय छिड़काव के लिए 114 रूपये प्रति वृक्ष की अनुदान राशि निर्धारित की गई है। उन्होंने बताया कि एक किसान को प्रथम एवं द्वितीय छिड़काव के लिये अलग-अलग अधिकतम 84-84 वृक्षों पर अनुदानित दर पर छिड़काव का लाभ दिया जा रहा है। श्री यादव ने बताया कि लीची में दहिया कीट पौधों की कोशिकाओं से रस चूसकर मुलायम तनों एवं मंजरों को सुखा देता है, जिससे फल गिरने लगते हैं।

GNSU Admission Open 2026

इसके नियंत्रण के लिये बाग की मिट्टी की नियमित निकाई-गुड़ाई, तने के निचले हिस्से में अल्काथीन या प्लास्टिक की पट्टी लपेटकर उस पर ग्रीस लगाने तथा अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।इसके अतिरिक्त लीची माइट कीट पत्तियों के निचले भाग से रस चूसकर पत्तियों को भूरा एवं सिकुड़ा हुआ बना देता है। इसके प्रबंधन के लिए संक्रमित पत्तियों एवं टहनियों को काटकर नष्ट करने तथा सल्फर, इथियॉन अथवा प्रोपरजाइट का अनुशंसित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं स्टिक बग कीट फरवरी से अप्रैल के बीच अधिक सक्रिय रहता है, जो फूलों एवं फलों को नुकसान पहुंचाता है। इसके नियंत्रण के लिये यांत्रिक विधियों के साथ-साथ अनुशंसित कीटनाशकों का 15 दिनों के अंतराल पर दो छिड़काव करने का निर्देश दिया गया है।

GNSU Admission Open 2026