नयी दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान एक बार फिर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया गया, तो संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल पाएगी। जयराम रमेश ने यह बयान सदन में बढ़ते गतिरोध और बार-बार हो रहे हंगामे के बीच दिया।
जयराम रमेश ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका बेहद अहम होती है और यदि सरकार विपक्ष के नेता को बोलने से रोकती है, तो यह संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर राहुल गांधी को बोलने से रोक रही है, ताकि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बचा जा सके। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि सदन को चलाने की जिम्मेदारी सिर्फ विपक्ष की नहीं, बल्कि सरकार की भी है।
उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी देश से जुड़े गंभीर विषयों—जैसे महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की समस्याएं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति—पर अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन बार-बार उन्हें मौका नहीं दिया जा रहा। जयराम रमेश के अनुसार, यह रवैया न केवल विपक्ष का अपमान है, बल्कि देश की जनता की आवाज को भी दबाने जैसा है।
कांग्रेस नेता ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर राहुल गांधी को सदन में बोलने नहीं दिया गया, तो विपक्ष को मजबूरन कार्यवाही का बहिष्कार करना पड़ेगा। उन्होंने इसे सरकार की हठधर्मिता बताया और कहा कि संवाद के बिना लोकतंत्र नहीं चल सकता।
इस बयान के बाद संसद परिसर में राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने कांग्रेस के रुख का समर्थन किया है, जबकि सत्तापक्ष ने आरोपों को बेबुनियाद बताया है। फिलहाल, सदन की कार्यवाही पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं और आने वाले दिनों में टकराव और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।







