नयी दिल्ली: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। बुधवार को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने अमेरिका के उस दावे पर सवाल उठाए, जिसमें कहा गया है कि भारत कुछ अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ शून्य कर सकता है और अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक के ऊर्जा, कृषि, डेयरी, प्रौद्योगिकी और कोयला उत्पाद खरीद सकता है। अखिलेश यादव ने इस संभावित समझौते को “समझौता नहीं बल्कि ढील” करार देते हुए कहा कि केंद्र सरकार देश का बाजार अमेरिका के हवाले कर रही है।
उन्होंने विशेष रूप से कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर चिंता जताई। अखिलेश यादव ने कहा कि यदि अमेरिका से डेयरी और कृषि उत्पाद भारत में आयात होते हैं, तो इससे न केवल किसानों को नुकसान होगा बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सनातन परंपरा मानने वाले लोगों को अपने व्रत और आहार को लेकर परेशानी हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि स्वदेशी का नारा देने वाले भाजपा के सहयोगी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं और देश को इस समझौते के वास्तविक विवरण क्यों नहीं बताए जा रहे।
अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किए जाने की बात सामने आने के बाद देश में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि इस समझौते के सभी पहलुओं पर संसद में खुली चर्चा होनी चाहिए, ताकि किसानों, छोटे उद्योगों और आम जनता पर इसके प्रभाव को समझा जा सके।
इसके साथ ही सपा प्रमुख ने चीन के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार संसद में चीन के साथ संबंधों पर चर्चा से बचती रही है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भारत ने न केवल अपना बाजार खोया है, बल्कि सीमा पर जमीन भी गंवाई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सीमा सुरक्षा और चीन के साथ संबंधों पर सशस्त्र बलों की राय देश के सामने आनी चाहिए। उनका कहना था कि विदेश नीति के फैसले पारदर्शिता और व्यापक विमर्श के साथ लिए जाने चाहिए, क्योंकि इनका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और संप्रभुता पर पड़ता है।







