बिहार (डेस्क)। आज माघ पूर्णिमा है और आज का दिन खास माना जाता है। आज ही के दिन संत शिरोमणि रविदास जयंती मनाई जाती है। शन्त शिरोमणि रविदास जो समता, प्रेम और मानवता का संदेश के लिए जाने जाते है। भारत की संत परंपरा में संत शिरोमणि रविदास का नाम अत्यंत श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाता है। वे न केवल एक महान संत और कवि थे, बल्कि सामाजिक समता, मानव गरिमा और आध्यात्मिक चेतना के प्रबल प्रवक्ता भी थे। हर वर्ष माघ पूर्णिमा के अवसर पर रविदास जयंती मनाई जाती है, जो उनके विचारों और आदर्शों को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
संत रविदास का जन्म 15वीं शताब्दी में उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में माना जाता है। वे एक साधारण परिवार से थे, लेकिन उनकी साधना, भक्ति और ज्ञान ने उन्हें महान संतों की श्रेणी में स्थापित कर दिया। उन्होंने अपने जीवन के माध्यम से यह सिद्ध किया कि ईश्वर भक्ति के लिए जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति कोई बाधा नहीं है। उनका संपूर्ण जीवन सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध एक सशक्त संदेश था।
संत रविदास ने निर्गुण भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाया और ईश्वर को निराकार मानते हुए प्रेम, करुणा और सेवा को सच्ची भक्ति का मार्ग बताया। उनके अनेक पद और भजन आज भी गुरु ग्रंथ साहिब में सम्मिलित हैं, जो उनकी आध्यात्मिक ऊँचाई और सर्वधर्म समभाव के विचारों को दर्शाते हैं। उनके प्रसिद्ध विचारों में “बेगमपुरा” की परिकल्पना विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जहाँ उन्होंने ऐसे समाज का सपना देखा जिसमें कोई दुःखी न हो, कोई भेदभाव न हो और सभी को समान अधिकार प्राप्त हों।
रविदास जी का संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है। जब समाज में जाति, धर्म और वर्ग के आधार पर विभाजन की प्रवृत्तियाँ दिखाई देती हैं, तब संत रविदास के विचार हमें समता, भाईचारे और मानवता की राह दिखाते हैं। उन्होंने कर्म, सच्चाई और प्रेम को जीवन का आधार बताया और दिखावे तथा आडंबर का विरोध किया।
रविदास जयंती के अवसर पर देशभर में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गुरुद्वारों, मंदिरों और समाजिक संस्थानों में भजन-कीर्तन, विचार गोष्ठियाँ और सेवा कार्य किए जाते हैं। यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना को जागृत करने का अवसर भी है।
संत रविदास का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति वही है जो इंसान को इंसान से जोड़ती है। उनका सपना एक ऐसे समाज का था जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, समानता और प्रेम के साथ जीवन जी सके। रविदास जयंती पर उनके विचारों को आत्मसात करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। उनके बताए मार्ग पर चलकर ही हम एक समरस, न्यायपूर्ण और मानवीय समाज का निर्माण कर सकते हैं।







