
महाराष्ट्र: अजित पवार के असामयिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में नेतृत्व का खालीपन गहराता जा रहा है। बुधवार को विमान दुर्घटना में निधन होने वाले उपमुख्यमंत्री और एनसीपी के वरिष्ठ नेता अजित पवार के पास वित्त, योजना, राज्य उत्पाद शुल्क, खेल, युवा कल्याण और अल्पसंख्यक विकास जैसे कई महत्वपूर्ण विभाग थे। उनकी मृत्यु से यह सभी विभाग रिक्त हो गए हैं और पार्टी अब अपने अधिकारों और गुटीय संतुलन को बनाए रखने की चुनौती का सामना कर रही है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार शनिवार को एनसीपी विधायक दल की बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को गुट का नेता और उपमुख्यमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया जा सकता है। इस बैठक का उद्देश्य न केवल पार्टी में स्थिरता लाना है, बल्कि महायुति गठबंधन के साथ पार्टी के संबंधों को भी बनाए रखना है। वरिष्ठ नेता प्रफुल पटेल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी किसी भी निर्णय से पहले जनता की भावनाओं और परिवार की संवेदनाओं का ध्यान रखेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी जल्द ही सुनेत्रा पवार और परिवार के साथ भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेगी।
अजित पवार के निधन ने एनसीपी के भीतर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके चाचा शरद पवार और चचेरी बहन सुप्रिया सुले के नेतृत्व वाले गुट के साथ विलय की अटकलें फिर से तेज हो गई हैं। इससे न केवल पार्टी का भविष्य, बल्कि महाराष्ट्र की सत्ता में एनसीपी की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और छगन भुजबल भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर विभागों के नियंत्रण और गुटीय हितों पर चर्चा कर चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सुनेत्रा पवार के नेतृत्व में एनसीपी का गुट एकजुट होकर न केवल अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, बल्कि पार्टी की भावी रणनीति और महायुति गठबंधन में उसके स्थान को भी मजबूत करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह कदम पार्टी के लिए भावी स्थिरता और महाराष्ट्र की राजनीति में संतुलन बनाने की दृष्टि से अहम माना जा रहा है।






